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अगर बच्चों एवं महिलाओं में ह्यूमोग्लोबिन पूरा करना है तो भोजन के साथ व बाद चाय का सेवन बंद करना होगा

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If haemoglobin needs to be replenished in children and women, then consumption of tea with or after meals will have to be stopped

mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
भारत में विशेषकर उत्तरी भारत में चाय पीने की एक खास आदत है जो वास्तव में बहुत खतरनाक होती है और वो आदत हमारे स्वास्थ्य के लिए वर्षों से हानिकारक है। हमने जितना ऑब्जर्व किया है यहां लोगों को हेल्थ के बारे में अधिक जागरूकता नहीं होती है, क्योंकि हम भोजन के विषय में जानना ही नहीं चाहते है, उसमें विरुद्ध भोजन की अवधारणा को भी कभी जानने की कौशिश नहीं की है, किसी खाद्य पदार्थ के साथ किस खाद्य पदार्थ का मेल है इसे भी जानने का प्रयास नहीं करते है।

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली मेरी बहनों, बेटियों तथा माताओं तथा यहां तक कि अधिकतर लोगों में क्यों आयरन की कमी हो जाती है, और यही हालत शहरी क्षेत्र में भी होती है, इसे कभी जाना ही नहीं। अधिकतर बेटियों में ह्यूमोग्लोबिन की कमी होती है, आयरन की कमी होती है, विटामिन डी, तथा विटामिन बी की भी कमी होती है, हड्डियों की कमजोरी भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है। हमारे भोजन की पौष्टिकता होने के बावजूद भी हमारे रक्त में आयरन की कमी क्यों होती है, इसे हमने कभी जानने के क्रम में कौशिश नहीं की है। यहां वर्षों से हमारे भोजन का एक पैटर्न रहा है जिसमें या तो भोजन के साथ हम चाय का सेवन करते है या फिर हम भोजन के तुरंत उपरांत चाय का सेवन करते है, बस यही है बीमारी की जड़। हम अक्सर देखते है कि जब घरों में भोजन करते है तो उसके बाद चाय को परोसने का एक चलन है भारतीय घरों में, जिसके कारण हमने भोजन में जो आयरन लिया था

वो चाय के सेवन के कारण शरीर में एब्जॉर्ब नहीं हो पाता है। इस विषय के बारे में कोई भी चिकित्सक एवं मेडिकल एजेंसी जानकारी देने का कार्य नहीं करते है। जब हम छोटे होते थे, या वर्तमान में भी भोजन के साथ चाय का सेवन किया जाता है। हम अपने बच्चों में तो अक्सर चाय के साथ ही रोटी खाते थे, भले ही उसके साथ कोई सब्जी भी खा रहे होते थे तो भी चाय अवश्य पीते थे, जिसके कारण हमारे भोजन में उपलब्ध आयरन लगभग खत्म ही हो जाता था, जिसका ज्ञान हमे था ही नहीं। आजकल तो अति आधुनिकता के चक्कर में हमारे यहां विवाह शादियों में तो ये नियम ही बन गया है कि खूब महंगा भोजन तैयार कराओ, चार पांच हजार रुपयों की एक प्लेट भोजन बनवाओ, कहीं कहीं तो इससे भी अधिक महंगा भोजन तैयार किया जाता है,

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उसमें विभिन्न प्रकार के पौष्टिक आहारों के सारे पौष्टिक तत्वों का खात्मा इसी चाय के सेवन से हो जाता है क्योंकि हम एक तो विरुद्ध भोजन करते है, दूसरा शादियों में भोजन के बाद चाय या काफी आदि का सेवन किया जाता है, इसलिए उसमें उपलब्ध आयरन और कई विटामिन्स भी शून्य होने के कगार पर पहुंच जाते है। सबसे अधिक हानि दुग्ध से बने हुए खाद्य पदार्थ हानिकर होते है क्योंकि उसमें दही भी है, पनीर भी है, फिर उसके साथ कड़ाई में उबल रहे बादाम काजू पड़े दूध का मोह भी नहीं छूटता है, वही हमारी सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। अगर शादी विवाह के छप्पन प्रकार के भोजन इतने ही उपयोगी होते तो लोग सादगी से भरे चूल्हे की रोटी, सिंपल दाल नहीं ढूंढते फिरते है।

हमने देखा है और सभी ही देखते है कि विवाह में भोजन पर इतना पैसा लुटाने के बाद भी वो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक क्यों नहीं होता है, इसका कारण एक ही है कि हम वहां विरुद्ध भोजन करते है, जरूरत से अधिक भोजन करते है, भोजन के बाद चाय कॉफी का सेवन करते है, उसके साथ नकली दूध पीते है, जिसमें हो सकता बादाम काजू भी बेहद निम्न स्तर के हो। अब समय आ गया है कि हमे अपने भोजन के विषय में जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि भोजन ही हमारी आयु तय करता है, हमारे तन मन की स्थिति तय करता है, भोजन ही हमारे स्वास्थ्य को तय करता है, भोजन ही तय करता है कि हम कितने वर्ष जीयेंगे। सभी मातापिता को ये ध्यान रखना चाहिए कि वो खुद भी तथा अपने बच्चों को भोजन के उपरांत चाय या काफी आदि ना दे,

खाने के साथ चाय का सेवन न करने दें। ह्यूमोग्लोबिन की कमी से ना केवल हमारे शरीर की हर कोशिका तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है बल्कि ब्रेन के हर सेल तक भी ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों में मेमोरी पावर भी घटती है। हम अक्सर कहते है कि बच्चों के दिमाग चलते नहीं है, उसमें पौष्टिकता होने के बाद भी हम खुद ही चाय या विरुद्ध खानपान की वजह से उसकी पौष्टिकता कम कर लेते है। हमे अपने बच्चों, महिलाओं, युवाओं के भोजन में आयरन की मात्रा उपयुक्त रखने के लिए भोजन में पालक, भीगे हुए काले चने, गुड, बथुआ, चौलाई या हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही कैल्शियम की मात्रा भी उपयुक्त मात्रा में होना चाहिए। हमारे उत्तरी भारतीय भोजन में भोजन का सूखापन भी बीमारियों को अधिक आकर्षित करते है। हमे अपने भोजन में विटामिन बी की मात्रा बढ़ाने के लिए फर्मेंटेड फूड को भी शामिल करने की आवश्यकता है। अगर बच्चों को बीमारियों से बचाना है, उनकी याददाश्त तीव्र करनी है तो उनके भोजन में आयरन की मात्रा का ध्यान रखना ही होगा, क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन की ही जरूरत होती है। रक्त में आयरन ही ऑक्सीजन को ले जाने का कार्य करता है, वही ऑक्सीजन करियर है। इसलिए हमे बिना समय गवाएं अपने भोजन के साथ या उसके उपरांत चाय कॉफी पीना तुरंत बंद कर देना चाहिए, ताकि हम सभी स्वस्थ रह सकें।
जय हिंद, वंदे मातरम