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रात्रिभर सोने के बाद भी नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत

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mahendra india news, new delhi

आज भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास टाइम नहीं है। रात्रिभर सोने के बाद भी सुबह उठते वक्त थकान और सुस्ती महूसस होती है। लगातार 7 से 8 घंटे सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब स्लीव क्वालिटी, तनाव, हिहाइड्रेशन, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और शरीर में पोषण की कमी. 

लाइफस्टाइल में कुछ आदतों में बदलाव करके सुबह उठने के बाद स्वयं को फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं तो ऐसे में जानिए सुबह की थकान दूर करने के लिए क्या करना चाहिए. 

सुबह उठने के बाद थकान क्यों महसूस होती है 
रात्रि में बार-बार नींद टूटना 
7 घंटे से 8 घंटे सोना केवल काफी नहीं होता है, खराब स्लीप क्वालिटी की वजह से भी सुबह के समय सुस्ती महसूस होती है. 
शरीर में आयरन, विटामिन्स की कमी 
तनाव और चिंता 
देर रात तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना 
शरीर में पानी की कमी 
सोने और जागने का अलग-अलग समय 

थकान कैसे दूर करें 
प्रतिदिन एक ही समय पर सोएं और जागें 
अच्छी नींद के लिए रोज एक ही तय वक्त पर सोना और उठना चाहिए. इससे बॉडी का बॉडी क्लॉक बैलेंस रहता है. ऐसा करने से नींद की गुणवत्ता अच्छी होती है. रोजाना एक ही समय सोने और उठने पर सुबह के साथ सुस्ती और थकान महसूस नहीं होती है. छुट्टी के दिन भी अपने स्लीप शेड्यूल में बदलाव ना करें. 

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पानी पीएं 
रात्रिभर सोने के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. सुबह उठते ही 1 से 2 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए. पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. इस कारण से मेटाबॉलिज्म काफी एक्टिव रहता है. आप दिन की शुरुआत गुनगुने पाने से भी कर सकते हैं. 

धूप 
प्रतिदिन 15 मिनट से 20 मिनट की हल्की धूप लें, प्रतिदिन हल्की धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है. विटामिन डी की मदद से रात को अच्छी नींद आती है. 

हल्का वर्कआउट 
सुबह उठते ही हल्का वर्कआउट कर सकते हैं जैसे योग, वॉक, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आदि. इन एक्सरसाइज को करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है. जिससे मांसपेशियों में जकडऩ कम होती है. पूरा दिन शरीर एक्टिव रहता है. 

हेल्दी ब्रेकफास्ट 
प्रतिदिन सुबह का नाश्ता नहीं छोडऩा चाहिए. नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स जैसे अंडे, ओट्स, दही और फल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है, बॉडी को सुस्ती भी कम होती है. 


नोट: ये खबर आपको केवल जागरूक करने के लिए लिखी गई है. इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है, अपनी सेहत के लिए चिकित्सक से परामर्श लें।