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HARYANA में नर्सरी, टिश्यू कल्चर यूनिट, बीज उत्पादन तथा बागवानी प्रबंधन के लिए सरकार दे रही 50 प्रतिशत तक सब्सिडी

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Mahendra india news, new delhi

उद्यान विभाग HARYAN द्वारा किसानों को बागवानी क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदान सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। विभाग ने नर्सरी, टिश्यू कल्चर यूनिट, बीज उत्पादन तथा बागवानी प्रबंधन से जुड़े कार्यों पर किसानों के लिए सब्सिडी की योजना क्रियांवित की जा रही है, जिससे किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें। योजना के तहत लघु नर्सरी (0.4 से 1 हेक्टेयर) स्थापित करने पर प्रति हेक्टेयर 20 लाख रुपये की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके तहत किसानों को प्रति इकाई 10 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी, साथ ही प्रतिवर्ष 50,000 गुणवत्ता वाले पौधों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार, 1 से 2 हेक्टेयर क्षेत्र में दीर्घ नर्सरी स्थापित करने पर 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर लागत के साथ 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जिसमें अधिकतम 24 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। वर्तमान नर्सरी को उन्नत बनाने के लिए भी विभाग 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम 2 लाख रुपये) प्रदान कर रहा है।

टिश्यू कल्चर यूनिट और बीज उत्पादन को बढ़ावा

नई टिश्यू कल्चर इकाई स्थापित करने पर 250 लाख रुपये की लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसमें अधिकतम 100 लाख रुपये तक की सहायता संभव है। इसके लिए प्रति वर्ष न्यूनतम 10 लाख पौधों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन, हैंडलिंग, प्रोसेसिंग और पैकिंग के लिए 300 लाख रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसमें अधिकतम 150 लाख रुपये तक की सहायता शामिल है।

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सब्जी और मसाला बीज उत्पादन पर भी सहायता

ओपन पॉलिनेटेड तकनीक के तहत 1 से 2 हेक्टेयर में सब्जी/मसाला बीज उत्पादन करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान के साथ 7,000 रुपये प्रति एकड़ (अधिकतम 5 एकड़ तक) सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं उच्च तकनीक लघु नर्सरी के लिए 1,200 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसमें अधिकतम सीमा 60 लाख रुपये प्रति इकाई निर्धारित की गई है।

SIRSA जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि HARYANA सरकार किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर बागवानी और आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर प्रेरित कर रही है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों और बीजों का उत्पादन भी बढ़ेगा। उन्होंने किसानों से अपील की गई है कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति औऱ मजबूत करें।