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नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव में बेटी लक्ष्मी को घोड़ी पर बैठाकर निकाली बनौरी,, दिया बेटा-बेटी समानता का संदेश

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In the village of Nathusari Chaupata area, daughter Lakshmi was taken out on a mare and taken out in Banori, giving the message of son-daughter equality
mahendra india news, new delhi

नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव जमाल में परंपराओं और समानता के संदेश से भरी एक अनोखी शादी की रस्म के तहत  बेटी की शादी में परंपरागत बनौरी कार्यक्रम को खास तरीके से मनाया गया, शादी समारोह में परंपरागत रस्मों के अनुसार बिनोरा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है इसी को लेकर लडक़ी के दादा  जमाल गौशाला के पूर्व प्रधान राम प्रताप  माहेश्वरी ने  कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसके तहत लक्ष्मी को घोड़ी पर बैठाकर उसे शाही अंदाज में बनौरी  निकाली गई । यह कदम समाज में बेटा-बेटी के बीच समानता का प्रतीक बन गया, जो आज के समय में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रतीक बनकर सामने आया है।

बेटी को घोड़ी पर बिठाकर निकाली बनौरी
गांव जमाल में आयोजित इस खास विवाह समारोह में मालचंद बिहानी महेश्वरी की बेटी लक्ष्मी को घोड़ी पर बैठाकर बनौरी निकाली गई। आम तौर पर यह रस्म लडक़े की शादी के समय ही होती है, लेकिन इस बार गांव के लोगों ने इसे एक नई दिशा दी। लक्ष्मी की शादी 4 फरवरी को ऐलनाबाद निवासी कैलाशचंद मालानी के बेटे मोहित से होने जा रही है।

लक्ष्मी की शादी में यह रस्म इस बात का प्रतीक थी कि अब समाज में बेटियों को भी वही सम्मान दिया जा रहा है, जो पहले केवल बेटों को मिलता था। लक्ष्मी  की शादी को लेकर पिता मालचंद बिहानी महेश्वरी ने कहा कि इस विशेष दिन को यादगार बनाने के लिए उन्होंने यह अनूठा कदम उठाया। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य डीजे पर नाच-गाकर खुशी का इज़हार करते रहे और शादी की सभी रस्मों को खुशी और जोश के साथ निभाया गया। लक्ष्मी ने इस मौके पर कहा की  मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझे उसी तरह से सहेजा और सम्मान दिया, जैसे किसी बेटे को दिया जाता है।

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इस मौके पर समाजसेवी ओम प्रकाश डूडी, कुलदीप जैन, वेदप्रकाश कसवाँ, विजय जैन, धर्मपाल सराहना करते हुए कहा की आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। समाज के बदलते परिवेश और शिक्षा के विकास के कारण अब रूढ़िवादी परंपराओं को लोग धीरे-धीरे तिलांजलि देने लगे हैं। पहले बेटियों को समाज में बोझ समझा जाता था, लेकिन अब शिक्षा और जागरूकता के कारण लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है।