home page

CDLU SIRSA में झींगा पालन” विषय पर ज्ञानवर्धक विस्तार व्याख्यान का आयोजन

 | 
Informative extension lecture on “Shrimp Farming” organized at CDLU SIRSA

 Mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, SIRSA के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा टैगोर एक्सटेंशन लेक्चर थिएटर में “झींगा पालन” विषय पर एक ज्ञानवर्धक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को झींगा पालन की वैज्ञानिक पद्धतियों, रोजगार संभावनाओं तथा इसके आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला मत्स्य अधिकारी, सिरसा जगदीश चंद्र रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में झींगा पालन की संपूर्ण प्रक्रिया - बीज चयन, तालाब प्रबंधन, पोषण, रोग नियंत्रण से लेकर विपणन तक को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सिरसा एवं आसपास के क्षेत्रों का खारा भूजल झींगा पालन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

साथ ही यहाँ की जलवायु परिस्थितियाँ जैसे तापमान, वर्षा एवं नमी भी इस व्यवसाय के लिए अनुकूल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि किसान मात्र 2.5 एकड़ भूमि से झींगा पालन प्रारंभ कर सकते हैं और सरकार द्वारा प्रारंभिक लागत पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। लगभग 120 दिनों की इस खेती से किसान एक वर्ष में 20 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं, जो इसे एक अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बनाता है।

WhatsApp Group Join Now


जगदीश चंद्र ने यह भी बताया कि झींगा पोषण की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध होता है, जिसमें 30-35 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ सूक्ष्म खनिज एवं स्वास्थ्यवर्धक वसा प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि सरकार परिवहन, प्रसंस्करण इकाइयों एवं अन्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं के लिए भी अनुदान उपलब्ध कराती है। वर्तमान में सिरसा जिला 2500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में झींगा पालन के साथ हरियाणा में अग्रणी स्थान पर है, जबकि डबवाली, कालांवाली एवं ऐलनाबाद जैसे क्षेत्रों में भी यह तेजी से विकसित हो रहा है।


अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ ऐसे नवाचारपूर्ण कृषि-आधारित व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि झींगा पालन न केवल आय का सशक्त माध्यम है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।


कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. हरकृष्ण ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. सुखमीत, डॉ. आलोक सहित अन्य शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विभिन्न विभागों के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने इस नए एवं लाभकारी व्यवसाय के बारे में जानकारी प्राप्त कर प्रसन्नता व्यक्त की। अंत में डॉ. हरकृष्ण ने मुख्य वक्ता एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।