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मांगों को पूरा करने की बजाय संघर्ष से मिली सुविधाओं को बंद करने पर तुली सरकार: बाबूलाल

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Instead of fulfilling the demands, the government is bent on stopping the facilities obtained through struggle: Babulal

mahendra india news, new delhi
कच्चे कर्मचारियों को पक्का करवाने व हरियाणा रोजगार कौशल निगम भंग करवाने सहित अन्य मांगों को लेकर सब अर्बन यूनिट व सिटी यूनिट कार्यकारिणी की सभा यूनिट प्रधान गुलबाग सिंह व मीत चंद की संयुक्त अध्यक्षता में हुई। मंच का संचालन लखबीर सिंह व सतबीर सिंह कुंडू ने किया। आॅल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर्ज यूनियन के राज्य उपप्रधान बाबूलाल, सर्कल सचिव मदनलाल व वरिष्ठ कर्मचारी नेता एसएस बेदी ने संयुक्त बयान में बताया कि हरियाणा सरकार कर्मचारियों की पिछले काफी समय से लंबित पड़ी मांगों को पूरा करने की बजाय जो सुविधाएं कर्मचारियों को लंबे संघर्ष के बाद मिली थी, उन्हें भी वापिस ले रही है।

एलटीसी सुविधा को अगले सैशन से बंद करने का ऐलान हो चुका है। अब महिला कर्मचारियों की चाइल्ड केयर लीव के लिए उपायुक्त कार्यालय से अनुमति लेनी पड़ेगी। दिव्यांग की आयु 60 से 58 वर्ष हो रही है। इन सब बातों को लेकर कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी रोष है। उन्होंने आगे बताया कि लगातार कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं और नई भर्ती हो नहीं रही। जिसके चलते कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। कच्चे कर्मचारियों का जमकर शोषण हो रहा है।

हरियाणा कौशल निगम में जाने के बाद मेडिकल सुविधा बंद हो गई, कच्चे कर्मचारियों की रिटायरमेंट पर उनको महकमे या सरकार की तरफ से कोई इंसेंटिव या प्रोत्साहित राशि नहीं दी जाती। औजारों की कमी के कारण लगातार कर्मचारी दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। जो टी एंड पी किट हाल ही में सर्कल स्तर पर भेजी गई है, वह इतनी कम है कि ज्यादातर कर्मचारी टी एंड पी किट से वंचित रह जाएंगे। या यूं कहें कि ये टी एंड पी किट ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। प्रदेश में निगम के सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करवाने के लिए प्रदेशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाकर हस्ताक्षर करवाए जाएंगे व कर्मचारियों की मांगों को लेकर 20 मई 2026 को बिजली मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार प्रदेश के सभी कच्चे कर्मचारी को सरकार ने चार सप्ताह में पक्का करना था, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। न ही इस पर कोई कार्रवाई की। यूनियन मांग करती है कि पिछली नीतियों 1993-1997-2003-2007 और 2011 के हिसाब से रेगुलर नीति बनाकर सरकार इनको पक्का करे। बैठक में शीशपाल नेहरा, अशोक शर्मा, अजय पासी, ललित सोलंकी, ज्वाला सिंह, हरि कृष्ण कंबोज, मनमोहन, रविकांत, विजयपाल, संजय जगतार, सुरेंद्र आर्य, विजय मजोकां, हरदेव सिंह, बिटू सिंह, नरेश कुमार आदि ने भी अपने विचार रखे।