विज्ञान में महिलाओं का योगदान: ग्लोबल विमेंस ब्रेकफास्ट (GWB-2026)” विषय पर अंतरराष्ट्रीय ई-सेमिनार का आयोजन
mahendra india mews. new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के रसायन विभाग द्वारा “विज्ञान में महिलाओं का योगदान: ग्लोबल विमेंस ब्रेकफास्ट (GWB-2026)” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-सेमिनार का आयोजन टैगोर एक्सटेंशन लेक्चर थियेटर में किया गया। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री तथा विजनाना भारती (International Union of Pure and Applied Chemistry and Vijnana Bharati) के सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए समावेशिता, समानता और विविधता को बढ़ावा देना रहा। इस वर्ष की थीम “मेनी वॉइसेस , वन साइंस रही। इस संबंध में जानकारी देते हुए विभाग की अध्यक्ष डॉ गीता रानी ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के दिशा निर्देशन में आयोजित ई सेमिनार में विषय विशेषज्ञों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, विकसित भारत का लक्ष्य, शोध एवं नवाचार में लैंगिक समानता आदि विषयों पर अपने विचार रखे।
प्रमुख वक्ताओं में प्रो. दीप्ति धर्मानी (कुलपति, सीबीएलयू भिवानी) ने विज्ञान में महिलाओं के नेतृत्व और निर्णय-निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को महिला शोधार्थियों को प्रोत्साहन और अनुकूल वातावरण प्रदान करना चाहिए। प्रो. सुषमा यादव (पूर्व कुलपति, खानपुर कलां) ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं की वैज्ञानिक उपलब्धियां समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनती हैं। उन्होंने युवा छात्राओं को आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
तुर्की से प्रो. सब्रिये यूसन ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नेटवर्किंग और सहयोग से ही समावेशी वैज्ञानिक समुदाय का निर्माण संभव है। नेपाल से डॉ. रचना घिमिरे ने विकासशील देशों में विज्ञान शिक्षा की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करते हैं।
प्रो. विक्रम सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और साइबर नैतिकता अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि आज शोध, नवाचार और वैज्ञानिक संवाद का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रहा है, ऐसे में साइबर अपराधों, डाटा सुरक्षा और डिजिटल जिम्मेदारी के प्रति जागरूक होना अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से साइबर स्पेस में सुरक्षित एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. गीता रानी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सेमिनार विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं तथा विज्ञान में महिलाओं की सशक्त भूमिका को सुदृढ़ बनाते हैं। कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन (गूगल मीट) एवं ऑफलाइन मोड में किया गया। सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर प्रो. प्रियंका सिवाच, प्रो. सुल्तान, प्रो. मीना बाल्यान, प्रो. रणजीत कौर, प्रो. उमेद, प्रो. राजबीर दलाल, डॉ. अमित सांगवान, डॉ. रविंदर, डॉ. जसबीर सिंह सहित विभिन्न अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।
