जेसीडी SIRSA में श्री शिव शक्ति धाम की प्राण प्रतिष्ठा के अंतर्गत जलाधिवास व अन्नाधिवास संपन्न
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जेसीडी विद्यापीठ, सिरसा परिसर में निर्मित भव्य श्री शिव शक्ति धाम की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दूसरे दिन जलाधिवास और अन्नाधिवास के पावन अनुष्ठान भक्ति, श्रद्धा तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य विधिवत रूप से सम्पन्न हुए। पिछले एक वर्ष से निर्माणाधीन यह मंदिर अब आस्था, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। मंदिर की विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न धर्मों के प्रतीकात्मक स्वरूप को स्थान दिया गया है, जो सर्वधर्म समभाव, आपसी भाईचारे और मानवीय एकता का संदेश देता है।
इस अवसर पर कथा प्रवक्ता परम पूज्य रजनीशाचार्य जी महाराज (श्री धाम वृंदावन) अपने शिष्यों—आचार्य अंकित तिवारी, आचार्य नीरज पाण्डेय, आचार्य सत्येंद्र द्विवेदी एवं पंडित कृष्णा पाठक—के साथ उपस्थित रहे। उनके सान्निध्य में वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न कराई गई, जिससे प्रातः एवं सायंकाल का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। महोत्सव के तीसरे दिन फलाधिवास और फूलाधिवास के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जय प्रकाश ने जलाधिवास और अन्नाधिवास के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जलाधिवास में देव प्रतिमा को पवित्र जल में स्थापित कर शुद्धि, जीवन ऊर्जा और दिव्य चेतना के जागरण का प्रतीकात्मक आह्वान किया जाता है। सनातन परंपरा में जल को जीवन का मूल तत्व माना गया है, इसलिए यह अनुष्ठान प्राण तत्व के आवाहन की प्रारंभिक प्रक्रिया का द्योतक है। वहीं अन्नाधिवास के माध्यम से समृद्धि, पोषण और लोककल्याण की भावना स्थापित की जाती है, जो यह दर्शाती है कि भगवान आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवनोपयोगी आवश्यकताओं के भी संरक्षक हैं। इन दोनों विधियों के माध्यम से देव प्रतिमा में पूर्ण चेतना और लोकमंगल की भावना का संचार किया जाता है।
दूसरे दिवस की पूजा में यजमान के रूप में डॉ. जय प्रकाश एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुषमा रानी तथा संदीप झिंझा एवं उनकी धर्मपत्नी नीतू झिंझा ने संयुक्त रूप से श्रद्धापूर्वक सहभागिता की, जबकि सायंकाल आयोजित अन्नाधिवास में सेठी राम एवं उनकी धर्मपत्नी ने श्रद्धाभाव से भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान भजन, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाए रखा।
श्री शिव शक्ति धाम का निर्माण केवल एक धार्मिक स्थल की स्थापना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह धाम भविष्य में विद्यार्थियों और समाज को सदाचार, अनुशासन, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की यह पहल क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।
