डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट पंजाब एवं डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में होगी संयुक्त शिक्षक कन्वेंशन आयोजित
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डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट पंजाब व डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा कार्यकारिणी की एक अहम गूगल मीट पंजाब व हरियाणा के राज्य प्रधान श्री विक्रम देव सिंह व श्री विजेंद्र मोर की संयुक्त अध्यक्षता में संपन्न हुई । संचालन दोनों राज्यों के महासचिव श्री महेंद्र कोरियावाली व श्री सुनील यादव द्वारा किया गया ।
डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा के राज्य महासचिव सुनील यादव ने जानकारी देते हुए बताया की डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट पंजाब एवं डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 24 मई 2026, रविवार को एक विशाल संयुक्त शिक्षक कन्वेंशन आयोजित कि जा रही है। इस महत्वपूर्ण कन्वेंशन में पंजाब, हरियाणा के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे । कन्वेंशन में 350 प्रतिनिधि शामिल होंगे । कन्वेंशन में देश की शिक्षा व्यवस्था, अध्यापकों के अधिकारों तथा सरकारी स्कूलों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी ।
कन्वेंशन के मुख्य मुद्दों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अध्यापकों पर प्रभाव, TET की अनिवार्यता, पुरानी पेंशन योजना की बहाली तथा हरियाणा सरकार की चिराग योजना से सरकारी स्कूलों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव प्रमुख रूप से शामिल हैं। दोनों शिक्षक संगठनों का मानना है कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनेक प्रावधान सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाले हैं। स्कूल कॉम्प्लेक्स, निजीकरण, कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था तथा प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में स्थायी अध्यापक पदों और सरकारी स्कूलों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न कर सकती हैं।
कन्वेंशन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। लंबे समय से सेवाएं दे रहे अध्यापकों को पुनः परीक्षाओं के दायरे में लाना उनके सम्मान और अनुभव दोनों के विपरीत है। हमारे संगठन ने मांग की है कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त किया जाए।
इसके अतिरिक्त पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर भी पांचों राज्यों के शिक्षक संगठन एकजुट होकर आवाज बुलंद करेंगे। संगठनों का कहना है कि नई पेंशन योजना कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित बनाती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों के बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती थी।
हरियाणा सरकार की चिराग योजना पर भी कन्वेंशन में गंभीर चिंता व्यक्त की जाएगी। शिक्षक संगठनों के अनुसार यह योजना सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की ओर स्थानांतरित करने का माध्यम बन रही है, जिससे सरकारी स्कूल कमजोर होंगे तथा शिक्षा का निजीकरण बढ़ेगा। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब एवं ग्रामीण वर्ग के विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।
कन्वेंशन समाप्ति के तुरंत बाद शिक्षक संगठनों का प्रतिनिधिमंडल महामहिम राज्यपाल महोदय को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाएगी कि पुरानी पेंशन योजना को तुरंत बहाल किया जाए, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में आवश्यक संशोधन किए जाएं, सरकारी स्कूलों को कमजोर करने वाली नीतियां वापस ली जाएं तथा 2010 से पूर्व नियुक्त अध्यापकों पर TET की अनिवार्यता लागू न की जाए।
डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट पंजाब व डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा ने सभी शिक्षकों, कर्मचारी संगठनों एवं शिक्षा प्रेमी नागरिकों से इस संयुक्त कन्वेंशन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है ताकि सरकारी शिक्षा और अध्यापकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत जनआवाज तैयार की जा सके
