के.एल. थियेटर प्रोडक्शंस की नाट्य प्रस्तुति 'शहीद' ने दर्शकों को किया भावविभोर
mahendra india news, new delhi
सिरसा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्तशासी संस्थान संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के अंतर्गत चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के सहयोग से टैगोर थिएटर में देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम माननीय कुलगुरु प्रो. डॉ. विजय कुमार के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. सुरेन्द्र सिंह कुंडू (डीएसडब्ल्यू) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राजकुमार निजात एवं प्रो. डॉ. श्याम लाल फुटेला (सेवानिवृत्त प्राचार्य) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रभक्ति के अमर स्वर वंदे मातरम के सामूहिक गायन तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके उपरांत संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की अध्यक्षा डॉ. संध्या पुरेचा का संदेश आॅडियो के माध्यम से सुनाया गया, जिसमें वंदे मातरम की ऐतिहासिक विरासत और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी प्रेरणादायी भूमिका का उल्लेख किया गया।
इसके पश्चात के.एल. थियेटर प्रोडक्शंस द्वारा नाटक निर्देशक कर्ण लढा के लेखन एवं निर्देशन में देशभक्ति पर आधारित नाटक में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां सहित अनेक क्रांतिकारियों के अदम्य साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण को अत्यंत मार्मिक एवं जीवंत शैली में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद, सजीव मंच-सज्जा, प्रकाश एवं संगीत संयोजन ने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में पहुंचा दिया। कई भावनात्मक दृश्यों के दौरान पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता की जय, इंकलाब जिÞंदाबाद तथा वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। अपने संबोधन में प्रो. डॉ. सुरेन्द्र सिंह कुंडू ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण ही नहीं,
बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी है। 'शहीद' जैसी प्रस्तुतियां युवाओं में देशभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करती हैं।" उन्होंने पूरी टीम को इस उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई दी। विशिष्ट अतिथियों डॉ. राजकुमार निजात एवं प्रो. (डॉ.) श्याम लाल फुटेला ने भी प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के जीवन से परिचित कराते हैं और उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने नाटक से जुड़े सभी कलाकारों एवं तकनीकी दल को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मेजर शक्तिराज सेवानिवृत उप निदेशक, दलबीर सिंह (प्रवक्ता एवं महासचिव, निफा), गार्गी सिंह, मदन वर्मा प्राध्यापक हिंदी, संस्कार भारती के वरिष्ठ सदस्य सतीश कंदोई, डा. चंद्रवीर आर्य और डॉ. विनोद कुमार सहायक प्रोफेसर सीडीएलयू एवं विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी, साहित्यकार, रंगकर्मी एवं बड़ी संख्या में कला-प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने एक स्वर में वंदे मातरम एवं राष्ट गान का सामूहिक गायन किया। राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत इस ऐतिहासिक आयोजन ने दर्शकों के मन में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रसेवा का नया संकल्प जागृत किया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन अमित लढा ने किया और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय के.एल. थियेटर प्रोडक्शंस, सिरसा द्वारा किया गया।
