सिरसा के कौशिक दंपत्ति को मिला भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान
mahendra india news, new delhi
सिरसा। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर भारतीय उच्चायुक्त कोलम्बो तथा पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग द्वारा स्वामी विवेकानंद संस्कृतिक केंद्र कोलंबो (श्रीलंका) में आयोजित लेखक मिलन शिविर (9 से 13 जनवरी) में पूर्व मलेरिया अधिकारी एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा. शील कौशिक एवं पूर्व उपनिदेशक पशुपालन विभाग एवं साहित्यकार डा. मेजर शक्तिराज को हिन्दी साहित्य लेखन तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान से विभूषित किया गया। यह सम्मान विवेकानंद संस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रोफेसर अंकुरण दत्ता, केलणिय विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीता सुभाषिनी तथा प्रोफेसर अतिला कोथलाविया द्वारा प्रदान किया गया।
श्रीलंका में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 18 राज्यों से शताधिक विद्वानों ने सहभागिता की। इस अवसर पर डा. शील कौशिक ने हिंदी: वैश्विक संवाद की भाषा विषय पर आलेख प्रस्तुत किया और डा. मेजर शक्तिराज ने ओजस्वी काव्य-पाठ किया। डा. शील कौशिक की लघुकथा, कहानी, आलोचना, बालसाहित्य, यात्रा वृत्तांत, लघु कविता, कविता, दोहा आदि में 66 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
हरियाणा साहित्य अकादमी से हिन्दी साहित्य रत्न तथा श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान सहित वे 17 राज्यों की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं तथा चार विदेशों की प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मानित हो चुकी हैं। उनके साहित्य पर पांच पीएचडी व छह एमफिल संपन्न हो चुकी हैं तथा इनके साहित्य पर पांच पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। ज्ञातव्य हो कि डा. मेजर शक्तिराज ने हिंदी, पंजाबी व अंग्रेजी में कविता, आलेख, दोहा, गजल, बाल साहित्य, लघुकथा, हायकु-तांका आदि विधाओं में 23 पुस्तकों का सृजन किया है।
हरियाणा ग्रंथ अकादमी पंचकूला तथा देश के 11 राज्यों की साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वे सम्मानित हो चुके हैं। इनके लेखन पर दो एमफिल तथा एक पी एचडी संपन्न हो चुकी है। सिरसा के इस साहित्यकार दंपति को नेपाल भूटान एमॉरीशस व श्रीलंका से भी विभिन्न सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। उनकी इस उपलब्धि पर सिरसा व हरियाणा के साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों ने शुभकामनाएं पे्रषित की हैं।
