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मनोविज्ञान का मर्म पुस्तक का विमोचन, दिव्यांग बच्चों की संवेदनाओं को समझने का सार्थक प्रयास : प्रो. विजय कुमार

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Launch of the book 'Manovigyan ka Marm': A meaningful effort to understand the sensitivities of differently-abled children – Prof. Vijay Kumar

 

सिरसा, 20 जून। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने काउंसलर एवं लेखिका कंचन मेहता की नव प्रकाशित पुस्तक "मनोविज्ञान का मर्म" का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में समाज, शिक्षा एवं सामाजिक सेवा क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और पुस्तक को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।

अपने संबोधन में कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, बच्चों के व्यवहार तथा सामाजिक परिवर्तनों को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि कंचन मेहता द्वारा लिखी गई यह पुस्तक केवल मनोविज्ञान का सैद्धांतिक अध्ययन नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन के अनुभवों और समाज की चुनौतियों को सरल भाषा में समझाने का एक सराहनीय प्रयास है। विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों से जुड़े विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना पुस्तक की महत्वपूर्ण विशेषता है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा ने लेखिका कंचन मेहता को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हुए कहा कि समाज सेवा और मनोवैज्ञानिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कंचन मेहता भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य करते हुए समाज को नई दिशा देने का कार्य करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें समाज में सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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लेखिका कंचन मेहता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि दिशा संस्था से जुड़कर उन्हें दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों के जीवन को निकटता से समझने का अवसर मिला। उन्हीं अनुभवों ने उन्हें मनोविज्ञान, परिवार, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर लेखन के लिए प्रेरित किया।

दिशा संस्था के सचिव एवं पल-पल समाचार के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया ने कहा कि कंचन मेहता ने अल्प समय में दिव्यांग बच्चों के साथ कार्य करते हुए जो अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें पुस्तक के माध्यम से समाज के सामने रखा है। यह पुस्तक केवल मनोविज्ञान की पुस्तक नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज निर्माण का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दलजीत सिंह कालड़ा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पुस्तक की विषयवस्तु, उद्देश्य और समाजोपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार को समझने में पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा, दिशा संस्था के प्रधान चंद्रशेखर मेहता, दिशा संस्था के सचिव एवं पल-पल समाचार के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया, मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दलजीत सिंह कालड़ा, गुलशन मेहता, नीलम भाटिया, भूपेंद्र पन्नीवालिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पुस्तक में दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, सोशल मीडिया के प्रभाव, डिजिटल युग की चुनौतियों, सकारात्मक सोच, काउंसलिंग, टोकन इकोनॉमी, एंग्जायटी तथा समावेशी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल एवं व्यवहारिक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने लेखिका कंचन मेहता को पुस्तक प्रकाशन की बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।