मिड-डे-मील कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपकर सीएम से मांगा बातचीत के लिए समय
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मिड डे मील वर्कर्स की मांगों व समस्याओं के बारे यूनियन प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता का समय की मांग को लेकर आशा वर्कर्स, मिड-डे-मील व आंगनवाड़ी वर्कर्स ने मिलकर संयुक्त रूप से प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन की राज्य प्रधान राजरानी, आशा वर्कर्स यूनियन से दर्शना रानी, सीटू के नेता विजय ढुकड़ा, आंगनबाड़ी यूनियन की नेता प्रमिला चौधरी ने कर्मचारियों को संबोधित किया। राज्य प्रधान राजरानी ने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स ने 4 अगस्त 2026 को कुरूक्षेत्र में हजारों की संख्या में पंहुचकर अपनी मांगों व समस्याओं बारे प्रदर्शन किया था।
कुरूक्षेत्र उपायुक्त द्वारा हमें सूचित किया गया था कि आपकी अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों के साथ 17 अगस्त को वार्ता होगी, लेकिन आज तक वार्ता नहीं हुई है। जिला उपायुक्त कुरूक्षेत्र ने हमें बार-बार आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक आपसे वार्ता का समय नहीं मिला है। राज्य की 29000 के करीब मिड डे मील वर्कर्स इस बात से आहत हैं। मिड डे मील वर्कर्स आपसे अनुरोध करते हैं कि हमारी मांगों पर वार्ता का दिन और समय निर्धारित किया जाए ।

इस मौके पर जिला प्रधान संतोष रानी, कृष्णारानी, नीतू रानी, निर्मला रानी, किरणा रानी, ममता रानी, ज्ञान-विज्ञान समिति से ललित सोलंकी, किसान सभा नेता हमजिंद्र सिंह, जनवादी महिला समिति से बलबीर कौर गांधी सहित अन्य संगठनों के नेतागण उपस्थित थे।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
मिड डे मील वर्कर्स का वेतन / मानदेय बढ़ाया जाए। इसे बढ़ाकर कम से कम हरियाणा के न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए, जोकि इस समय अकुशल श्रेणी के श्रमिक का 15220 रुपए प्रतिमाह है। मिड डे मील कुक के मानदेय में मई 2022 में बढ़ौतरी की गई थी । उस समय हरियाणा में श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 10098 रुपए प्रतिमाह था व मिड डे मील कुक का 7000 रुपए। अब अप्रैल 2026 से राज्य में अकुशल श्रमिकों का वेतन 15220 रुपए प्रतिमाह है, जबकि मिड डे मील कुक का केवल 7000 रुपए । इसलिए मिड डे मील वर्करों की भी वेतन बढ़ौतरी की जाए। जो मिड डे मील वर्कर्स में अधिक सीनियर है, उनके लिए वरिष्ठता के आधार पर अधिक मानदेय का प्रावधान किया जाए।
हमारी मांग न्यूनतम वेतन 30000 की है। अभी मिड डे मील कुक को केवल 10 महीने मानदेय मिलता है। शिक्षा विभाग के सभी कर्मियों को 12 महीने वेतन मिलता है । वैसे भी जनवरी महीने में 15 दिन अवकाश होता है। 15 दिन किए गए काम का भी पैसा नहीं मिलता। मानदेय 12 महीने दिया जाए । केन्द्र सरकार के बकाया मानदेय का तुरंत भूगतान हो । कई राज्यों में 12 व 11 महीने मानदेय मिलता है। मिड डे मील कुक का मानदेय उसके व्यक्तिगत बैंक खाते में आए। मानदेय प्रत्येक माह की 7 तारीख तक मिले। वर्तमान में मिल रहा पूरा मानदेय एक साथ मिले। विभाग ने पत्र जारी कर मिड डे मील वर्कर्स की सेवा 60 साल की आयु में समाप्त करने का निर्णय लिया है। हमारा अनुरोध है कि 2 लाख रुपए सेवानिवृति लाभ दिया जाए। (राज्य में आगंनवाड़ी वर्कर को 2 लाख रुपए, आशा वर्कर्स को 2 लाख रुपए, ग्रामीण चौकीदरों को भी 2 लाख रुपए सेवानिवृति राशि लागू की गई है।)
वर्दी के लिए वर्ष में दो ड्रैस के लिए केवल 600 रुपए वर्दी भत्ता मिलता है। इस महंगाई में 600 रुपए में एक ड्रैस भी नहीं बनती है। इसलिए दो ड्रेस के लिए एक वर्ष में कम से कम 2000 रुपए मिलने चाहिए। विभाग द्वारा 1500 रुपए वर्दी भत्ता बारे प्रस्ताव लंबे समय से आपके मंत्रालय में भेजा गया है। इसे तुरंत लागू किया जाए। राज्य में कार्यरत आंगनवाड़ीकर्मियों व आशा वर्कर्स के लिए भी 1500 रुपए वार्षिक भता तय किया गया है। इस वर्दी भत्ते का भुगतान भी बैंक खाते में सीधा किया जाए ।
किसी भी मिड डे मील वर्कर की दुर्घटना में घायल होने पर इलाज की व्यवस्था की जाए व 50000 रुपए मुआवजा तय किया जाए। मृत्यु होने पर आश्रितों को कम से कम 5 लाख रुपए मुआवजा मिले। (राज्य में आंगनवाड़ीकर्मियों, आशा वर्कर्स व अन्य स्कीम वर्कर्स व अस्थाई कर्मचारियों के लिए ऐसे प्रावधान पहले से सरकार ने किए हुए हैं।) सभी मिड डे मील वर्कर्स के बने। उनसे किसी प्रकार का शुल्क: न लिया जाए। स्कूलों को मर्ज करने व बंद करने के कदम वापस लिए जाएं। इसके चलते जिन वर्कर्स को हटाया जा रहा है, उन्हें काम पर वापस लिया जाए अथवा उन्हें दूसरे स्कूलो में मर्ज किया जाए। इसके लिए ब्लॉक / कल्स्टर को आधार बनाया जाए। मिड डे मील वर्कर्स को वेतन सहित 6 महीने का मातृत्व लाभ प्रदान किया जाए । सभी स्कूलो में जहां 10 का स्टाफ काम कर रहा है वहां महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न को रोकने व कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चत करने के लिए "महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम - 2013" की परिपालना की जाए। इसके लिए स्कूल में आंतरिक समिति का गठन किया जाए व इसके नाम सार्वजनिक हों। मिड डे मील कुक को महीने में न्यूनतम 2 अवकाश मिलें ।
मिड डे मील वर्कर्स का मैडिकल नि:शुल्क हो व साल में एक बार हो। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र जारी किया जाए । मैडिकल के लिए सीएचसी / पीएचसी स्तर पर कोई दिन तय किया जा सकता है। 12वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को मिड डे मील योजना के दायरे में लाया जाए। 4 साल के उपर के बच्चों को भी इसका हिस्सा बनाया जाए। उड़ीसा सरकार द्वारा 10वीं कक्षा तक के बच्चों को मिड डे मील योजना में शामिल किया गया है । राज्य में 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को स्कूलों में दूध पिलाने की व्यवस्था की गई है। इन्हें मिड डे मील भी दिया जाए । सभी मिड डे मील वर्करों को ईएसआई व पीएफ मे कवर किया जाए। मिड डे मील वर्करों को पक्का कर्मचारी बनाया जाए।
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