श्री स्वदेश रॉय ने पूर्ण की पीएच.डी.: समावेशी शिक्षा की सफलता में शिक्षकों की भूमिका निर्णायक
Mahendra india news, new delhi
पीलीबंगा (हनुमानगढ़)। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय, पीलीबंगा में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में श्री स्वदेश रॉय (व्याख्याता, न्यू दिल्ली YMCA, निज़ामुद्दीन) ने अपनी पीएच.डी. उपाधि सफलतापूर्वक पूर्ण की है। यह शोध “प्राथमिक एवं माध्यमिक सामान्य विद्यालयों के शिक्षकों की समावेशी शिक्षा के प्रति अभिवृत्ति का अध्ययन” विषय पर डॉ. अनीता सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ।
इस शोध में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के कुल 200 शिक्षकों को शामिल किया गया। मानकीकृत अभिवृत्ति मापक उपकरणों एवं सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से यह निष्कर्ष सामने आया कि सामान्य विद्यालयों में समावेशी शिक्षा की सफलता सीधे तौर पर शिक्षकों की सोच, प्रशिक्षण एवं व्यवहार पर निर्भर करती है।
शोध के अनुसार, यद्यपि शिक्षक सामान्यतः समावेशी शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, फिर भी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की तुलना में अधिक अनुकूल अभिवृत्ति प्रदर्शित करते हैं। इसका कारण प्राथमिक स्तर पर लचीला पाठ्यक्रम, कम अकादमिक दबाव तथा विद्यार्थियों के साथ अधिक निकट शैक्षणिक संपर्क बताया गया है।
अध्ययन में यह भी रेखांकित किया गया कि समावेशी एवं विशेष शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षक अधिक आत्मविश्वास, दक्षता एवं समावेशी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की तत्परता दिखाते हैं। वहीं, प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी, अपर्याप्त आधारभूत संरचना, बड़ी कक्षा-संख्या तथा माध्यमिक स्तर पर बढ़ता शैक्षणिक दबाव समावेशी शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रमुख बाधाएं हैं।
शोधार्थी श्री स्वदेश रॉय ने सुझाव दिया कि समावेशी शिक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु निरंतर शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यालय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता, विशेष शिक्षकों की नियुक्ति तथा प्रशासनिक सहयोग अनिवार्य है। यह शोध राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के सफल क्रियान्वयन की दिशा में नीति-निर्माताओं, शैक्षिक प्रशासकों एवं योजनाकारों के लिए एक सशक्त अकादमिक आधार प्रदान करता है।
