संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा : भागवत कथा श्रवण से ही मिल जाता है मोक्ष: डा. राधिका दीदी
mahendra india news, new delhi
सिरसा स्वर्णकार समाज की ओर से बेगू रोड स्थित सोनी धर्मशाला में आयोजित की जा रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथावाचिका डा. राधिका दीदी ने मुख्य रूप से 'भागवत महात्म्य', 'मंगलाचरण' और 'भक्ति-ज्ञान-वैराग्य' का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कथा की शुरूआत सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे...श्लोक से की, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनके द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति, पालन तथा संहार का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भागवत शब्द का अर्थ समझाते हुए बताया कि अर्थात 'भाव में रत होना' या जो भगवान का है।
डा. राधिका दीदी ने बताया कि देवर्षि नारद कलयुग में पृथ्वी पर आते हैं और वृंदावन में एक दुखी तरुणी को देखते हैं, जो 'भक्ति' है। भक्ति के दो पुत्र—'ज्ञान' और 'वैराग्य' थे, जोकि कलयुग के प्रभाव से वृद्ध और अचेत हो जाते हैं। नारद जी जब उन्हें जागृत करने का प्रयास करते हैं, तो आकाशवाणी होती है कि 'सत्कर्म' (श्रीमद्भागवत कथा श्रवण) से ही इन्हें पुनर्जीवन मिलेगा। इसके बाद हरिद्वार के आनंद घाट पर सनकादि कुमारों द्वारा देवर्षि नारद को भागवत कथा सुनाई जाती है, जिससे ज्ञान और वैराग्य पुन: युवा व चैतन्य हो जाते हैं।
इसके बाद कथावाचिका डा. राधिका दीदी ने धुंधुकारी और गोकर्ण प्रसंग के अंतर्गत आत्मदेव नामक ब्राह्मण, उनके कुपुत्र धुंधुकारी और विद्वान पुत्र गोकर्ण की कथा सुनाई। कथावाचिका ने बताया कि कलयुग के पापों के कारण प्रेत योनि में भटके धुंधुकारी को गोकर्ण जी द्वारा सात दिनों की भागवत कथा श्रवण कराने से मोक्ष प्राप्त होता है। यह प्रसंग दशार्ता है कि गंभीर पापी भी श्रद्धापूर्वक कथा सुनने से प्रभु धाम को प्राप्त कर सकता है। तत्पश्चात राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाकर कथा को विश्राम दिया गया।
संजय सोनी ने बताया कि कथा 31 मई से 6 जून तक चलेगी। कथा का समय सांय 03.15 बजे से सांय 6.15 बजे तक रहेगा। 07 जून को पूर्ण आहूति व भंडारा होगा। उन्होंने समस्त शहरवासियों से आह्वान किया कि समयानुसार कार्यक्रम में आकर कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बनें।
इस मौके पर सोनी समाज की बेटी व उकलाना की नवनियुक्त चेयरमैन रीमा सोनी सोनी, लक्खीराम सोनी, धर्मशाला के प्रधान सोनू गोरीवाला, तहसील प्रधान गजानंद सोनी सिरसा, जिला प्रधान सज्जन सोनी लीलाधर सोनी, संजय सोनी, कृष्ण सोनी, सुरजीत सोनी, सतपाल सोनी, प्रमोद सोनी, रामप्रताप सोनी, मदन सोनी, विकास सोनी, मुकेश सोनी, राजू सोनी, रामकिशन सोनी, मनोज सोनी, काशीराम सोनी सहित स्वर्णकार समाज के अनेक महानुभाव उपस्थित थे। कथा विश्राम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
