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सीडीएलयू SIRSA में ‘पंजाबी साहित्य के नए रुझान’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि दरबार आयोजित

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National Seminar and Kavi Darbar on 'New Trends in Punjabi Literature' organized at CDLU SIRSA

Mahender india news, new delhi
चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU), सिरसा के पंजाबी विभाग में हरियाणा केंद्रीय लेखक सभा के सहयोग से ‘पंजाबी साहित्य के नए रुझान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि दरबार का आयोजन किया गया। समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि उद्घाटन सत्र में कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार तथा डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. सुशील कुमार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।


कार्यक्रम का स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो. रणजीत कौर ने प्रस्तुत किया, जबकि अध्यक्षता डॉ. नरेंद्र सिंह विर्क ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुदर्शन गैसो तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में निंदर घुग्याणवी उपस्थित रहे।डॉ. सुदर्शन गैसो ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को साहित्य से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। निंदर घुग्याणवी ने लेखकों को अधिक जागरूक होने का आह्वान करते हुए कहा कि सोशल मीडिया साहित्य के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


कुलगुरु  प्रो. विजय कुमार ने पंजाबी विभाग की गतिविधियों की सराहना करते हुए अपनी कविता भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि पंजाबी साहित्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।

विश्वविद्यालय का दायित्व केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सृजनशीलता और सामाजिक सरोकारों की समझ विकसित करना भी है। ऐसे साहित्यिक आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और उन्हें नए विचारों के लिए प्रेरित करते हैं।इससे पूर्व कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां शोध और बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करती हैं। यह मंच विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने विचार साझा करने, नई दृष्टि विकसित करने और अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करता है।उद्घाटन सत्र के दौरान अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. नरेंद्र सिंह विर्क ने कहा कि साहित्य का उद्देश्य मनुष्य को बेहतर बनाना है और यह प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

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संगोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरसिमरन सिंह रंधावा ने की। इस सत्र में डॉ. सतप्रीत सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. गुरप्रीत सिंह और प्रो. सर्वजीत सिंह ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता बूटा सिंह विर्क ने की। इस सत्र में डीन अकादमिक डॉ. सुशील कुमार तथा हरविंदर सिंह विशिष्ट अतिथि  उपस्थित रहे। प्रो. रोहित कुमार, प्रो. राजविंदर कौर, डॉ. सुरिंदरपाल और डॉ. सिकंदर सिंह ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस सत्र में अध्यक्षीय संबोधन में बूटा सिंह विर्क ने प्रस्तुत शोध पत्रों की सराहना करते हुए पंजाबी साहित्य के नवीन रुझानों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के समापन पर कवि दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. सेवा सिंह बाजवा (डीन, मानविकी), डॉ. देवेन्द्र बीबीपुरिया, छिंदर कौर, सुरजीत सिरडी, गुरचरण जोगी, हरगोबिंद सिंह, कुलविंदर पारला, डॉ. सिकंदर सिंह, डॉ. बलवान औजला, डॉ. मंगल सिंह और भूपिंदर पन्नीवालिया सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।सेमिनार रिपोर्ट डॉ. बीरबल सिंह ने प्रस्तुत की और सभी अतिथि लेखकों का धन्यवाद प्रो. गुरसाहिब सिंह ने किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. हरदेव , डॉ. चरणजीत ,राजविंदर, मनप्रीत सिंह  ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।