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नौतपा, आज से नौतपा की होगी शुरूआत, नौतपा के इन 9 दिनों में किन बातों का रखें ध्यान

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Nautapa begins today, what should be kept in mind during these 9 days of Nautapa
mahendra india news, new delhi
हर साल नौतपा का इंतजार रहता है। नौतपा का इंतजार आज शनिवार यानि 25 अप्रैल से पूरा होने वाला है। ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ मास में जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में इंट्री करते हैं, तब शुरू होती है नौतपा की वह अवधि, जिसे वर्ष के सबसे गर्म और प्रभावशाली दिनों में गिना जाता है।


बता दें कि इस दौरान इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और लू का असर भी ज्यादा महसूस होता है। ज्योतिष और परंपरा दोनों ही दृष्टिकोण से यह वक्त विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे प्रकृति के संतुलन और आने वाले मौसम से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान कुछ सावधानियां बरतें और सूर्य देव से जुड़े उपाय करना फायदा माना जाता है।



नौतपा कब से शुरू होगा
आपको बता देंं कि नौतपा 2026 में 25 मई से मानी जा रही है, जो 2 जून तक जारी रहेगा। इस दौरान करीबन  9 से 10 दिनों तक भँयकर गर्मी और तेज धूप का असर देखने को मिलता है, जिसे वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत भी माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में यदि तीव्र गर्मी बनी रहती है, तो यह आगे अच्छी वर्षा और मानसून के शुभ संकेत देती है।

नौतपा के दौरान क्या करें
ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि सनातन परंपरा में नौतपा का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।  
इस अवधि में सूर्यदेव की ऊर्जा अपने चरम पर होती है।
इसे सकारात्मक साधना व सेहत सुधार के लिए शुभ मौका माना जाता है।
इस दौरान प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें, इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और उनके मंत्रों का जाप करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
इससे कुंडली में सूयख्खर्् की स्थिति मजबूत होगी है और मानसिक-शारीरिक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है।
इसके साथ ही नौतपा के दिनों में परोपकार और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
इस अवधि में प्याऊ लगाना, जल, शरबत, सत्तू, मिट्टी के घड़े, छाते, सूती वस्त्र, हाथ के पंखे तथा मौसमी फलों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
ऐसा करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि गर्मी के प्रभाव को कम करने और समाज की सेवा करने का भी मौका मिलता है।