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बच्चों के होमवर्क की टेंशन अब खत्म, ये मशीन कॉपी पर खुद लिखेगी सारा काम... देखें

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No more stress over children's homework—this machine will write out all the work in their notebooks itself... Take a look

mahendra india news, new delhi

Desi Jugaad Viral: अक्सर बच्चे होमवर्क को लेकर परेशान रहते हैं। लेकिन अब ऐसी मशीन आ गई है जो बच्चों का होमवर्क करेगी। इस होमवर्क मशीन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि यह एआई बेस्ड मशीन है। आपको सिर्फ इस मशीन को कॉपी पर एडजस्ट करना होगा। इस मशीन को भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था। 

केरल के देवदत्त पीआर ने बनाई "होमवर्क मशीन"

हैंडराइटिंग वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। फिलहाल, कुछ दिन पहले भी ऐसा ही वीडियो सामने आया था जिसमें एक भारतीय शख्स मिलता-जुलता हैंडराइटिंग मशीन का यूज कर रहा था।

बताया जा रहा है कि केरल के रहने वाले देवदत्त पीआर नाम के एक डिजाइनर, इंजीनियर और उद्यमी ने एक ऐसी मशीन बनाई है जो आपके लिए आपके होमवर्क को आपकी अपनी लिखावट में लिख सकती है।

यह मशीन एक रोबोटिक हाथ और एक कैमरा से लैस है जो आपके होमवर्क असाइनमेंट को स्कैन करता है और फिर उसे आपकी अपनी लिखावट में लिखता है।

कैसे देवदत्त ने बनाई ये मशीन

यह मशीन उन छात्रों के लिए बहुत उपयोगी हो सकती है जो होमवर्क करने में संघर्ष करते हैं या जिनके पास समय की कमी होती है। देवदत्त पीआर का मानना ​​है कि यह मशीन शिक्षा को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।

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यह निश्चित रूप से एक क्रांतिकारी आविष्कार है जो शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव ला सकता है। कॉलेज की सैकड़ों पन्नों की लैब रिपोर्ट लिख-लिखकर परेशान देवदत्त ने ये मशीन बनाई। उन्होंने प्रोग्रामिंग लैंग्वेज "पायथन" का इस्तेमाल किया, साथ ही रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी का भी सहारा लिया।

क्या है देवदत्त पीआर का किस्सा?

ये मशीन रट्टा लगाने और घंटों हाथ दुखाने वाले होमवर्क से निजात दिलाती है। एक मजेदार किस्सा ये भी है कि जब देवदत्त ने पहली बार इस मशीन से किया हुआ होमवर्क टीचर को दिया, तो उन्हें शक हुआ। असल में, लिखावट बहुत साफ और एक जैसी थी।

पकड़े जाने पर देवदत्त वापस गए और उन्होंने 120 लाइन्स का नया कोड लिखा ताकि लिखाई असली इंसान की तरह थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी हो जाए। उनका ये तरीका काम कर गया और टीचर को फिर कभी शक नहीं हुआ।