कृषि अधिकारियों ने कपास और धान की नर्सरी का किया सर्वेक्षण, किसानों को दिए महत्वपूर्ण सुझाव
Mahendra india news, new delhi
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (RCIPMC), फरीदाबाद की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. वंदना पांडेय के निर्देशन में जिला सिरसा के विभिन्न क्षेत्रों में कपास एवं धान की फसलों का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान किसानों को फसलों में लगने वाले कीटों एवं बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक जानकारी और सुझाव दिए गए।सर्वेक्षण में जिला कृषि विभाग के सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. विजेन्द्र चौहान, एसडीएओ डॉ. कोमल तथा कृषि विकास अधिकारी नाथूसरी चौपटा डॉ. शैलेन्द्र सहारण सहित विशेषज्ञों की टीम ने भाग लिया। अधिकारियों ने कपास की फसल एवं धान की नर्सरियों का निरीक्षण कर किसानों को बीज उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि धान की फसल में पिछले वर्ष देखे गए ड्वार्फ रोग तथा अन्य कीट एवं बीमारियों से बचाव के लिए बुवाई से पूर्व बीज उपचार अवश्य करें। साथ ही यांत्रिक एवं जैविक कीट नियंत्रण उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।कपास की फसल के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि फसल के शुरुआती चरण में कीटों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए 40 से 45 दिन बाद प्रति एकड़ कम से कम चार फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए। इसके अलावा रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए प्रति एकड़ 20 पीले एवं नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई।सर्वेक्षण के दौरान किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) मोबाइल ऐप के उपयोग की भी जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि इस ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीटों एवं बीमारियों की पहचान कर तत्काल समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी आएगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।इस संयुक्त सर्वेक्षण में आरसीआईपीएमसी, फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. लक्ष्मीकांत एवं डॉ. के.पी. शर्मा, जिला कृषि विभाग से डॉ. महेंद्र डांगी (बीटीएम) सहित प्रगतिशील किसान बिजेंद्र बेनीवाल और अन्य किसान भी उपस्थित रहे।
सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि वर्तमान में कपास एवं धान की फसलों में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप हानि स्तर से काफी कम है, जिससे किसानों को राहत मिली है। अधिकारियों ने किसानों से नियमित निगरानी रखने तथा विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करने का आह्वान किया।
