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बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ज्ञान के साथ जय हिंद का नारा गूंजेगा, यही मानव उत्थान का रास्ता

 
On the auspicious occasion of Basant Panchami, the slogan of Jai Hind will resonate with knowledge; this is the path to human upliftment
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 On the auspicious occasion of Basant Panchami, the slogan of Jai Hind will resonate with knowledge; this is the path to human upliftment
 mahendra india news, new delhi
माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मां सरस्वती के प्रकटीकरण के दिवस में रूप में मनाया जाता है, यही बसंत ऋतु के आगमन के रूप में देखा जाता है। यह बड़ा ही शौभाग्य है कि आज ही के दिन 1893 में भारत भूमि के सबसे उत्साही और महारथी स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था। भारत की आजादी के लिए नए तरीके से विमर्श करने वाले नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा ही कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल आर्मी का संचालन किया था, इसकी देखरेख कुछ दिनों तक महान स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बॉस जी के नेतृत्व में भी की गई थी। इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना 1942 में की गई थी। बसंत पंचमी का पावन दिन ज्ञान के दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय परम्पराओं के अनुसार सरस्वती माता ज्ञान की देवी है। जब हम सनातन संस्कृति में तीन देवियों की बात करते है तो उनमें ज्ञान की देवी मां सरस्वती, धन की देवी मां लक्ष्मी तथा सुरक्षा की देवी मां दुर्गा की बात करते है, और कभी कभी सुरक्षा के लिए मां काली के रूप में भी देखते है। इसी तरह भारत भूमि पर नेता जी सुभाष की वीरता को भी देखा जाता है। नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने कई महत्वपूर्ण नारे दिए थे, जिनमें दिल्ली चलो, तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा और जय हिंद का नारा भी दिया था। ज्ञान की देवी सरस्वती के प्रकटीकरण दिवस के दिन महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाषचंद्र बोस जी का जन्मोत्सव आना, हमारी युवा पीढ़ी को एक विशेष संकेत व संदेश देता है। बसंत पंचमी ज्ञान का दिवस है, जब हम किसी भी प्रकार के उत्थान, आरोहण, विकास की बात करते है तो उसके लिए जो जरूरी तत्व है वो ज्ञान है, बिना ज्ञान के विकास भी विनाश बन जाता है। हमारी सनातन परंपराओं में जब हम ज्ञान योग, भक्ति योग तथा कर्म योग की बात करते है तो उसमें भी सबसे पहले हम ज्ञान को ही महत्व देते है, ये तीनों स्थितियां भी ज्ञान के साथ चलती है। यह यही संकेत करती है कि सभी को अपना कर्म ज्ञान के साथ करना चाहिए और उस कर्म को विकास उन्मुख बनाने के लिए भक्ति योग का सहारा लेना चाहिए, ताकि हमारे कर्मों में अहंकार न आवे, हमारे कर्मों में विनम्रता रहें, हमारे कर्म शास्त्र विरुद्ध व नियम विरुद्ध न हो। माता सरस्वती ज्ञान की देवी है इसलिए हम सभी को आज यह संकल्प करना चाहिए कि हम जो भी कर्म करेंगे वो ज्ञान से प्रभावित हो, वो समझ से प्रभावित हो, वो निष्पक्ष हो, वो सभी के लिए कल्याणकारी हो, वो अहंकार से व अपराध से आच्छादित न हो। नीति शास्त्र के एक श्लोक में कहा गया है कि " ज्ञाने मौनम क्षमा शक्तौ त्यागे श्लाघविप्रयय:। गुणा गुनाअनुबंधतस्यतस्य प्रसवा ईव"।। अर्थात जब ज्ञान के साथ मौन शक्ति के साथ क्षमा तथा प्रशंसा बिना त्याग होता है तो गुण दूसरे गुण के साथ जुड़ता जाता है। हमे इसे ऐसे समझना चाहिए कि हमारा ज्ञान हमारी मौन, शक्ति, त्याग, दुख सुख में समत्व, विनम्रता में ही दिखता है। ज्ञान या जागरूकता के साथ किया गया हर कर्म जीवन को श्रेय मार्ग की ओर लेकर जाता है, इसके विपरित अज्ञान से किया गया हर कर्म पतन की ओर लेकर जाता है। महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा दिए गया नारा " जय हिंद" तब  ही संभव होगा, जब हम जीवन को ज्ञान की ओर उन्मुख करेंगे। जय हिंद का नारा तभी साकार होगा, जब हमारी नई पीढ़ी शिक्षा व शोध के द्वारा ज्ञान की नई उच्चाइयों को छुएंगे। जय हिंद का नारा तभी भारत को जय विजय दिलाएगा, जब भारत भूमि का एक एक युवा जीवन को कर्मठता के लिए तपाएगा। जय हिंद का नारा तभी सफल होगा, जब हमारे सभी युवा अंधविश्वास तथा पाखंड से दूर रहकर जीवन को केवल और केवल ज्ञान व कर्म पर आधारित रखेंगे। मुझे आज भी याद है, जब हम बहुत छोटे होते थे तो हर व्यक्ति के मन में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के लिए एक अलग तरह का आदर व जोश होता था। हमे देखने को मिलता था कि हर घर पर बाहर छज्जे पर जय हिंद लिखा होता था, बहुत से लोग तो अपने घरों के बाहर महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाषचंद्र बोस की तस्वीर उकेरवाते थे। लगभग सभी घरों में या तो अंदर नेता जी की तस्वीर होती थी या फिर मकान के बाहर सीमेंट से ही नेता जी की तस्वीर बनवाई जाती थी, लोगों में एक जुनून था, लेकिन जैसे जैसे स्वतंत्रता आंदोलन को देखने वाली या उसमें भाग लेने वाली पीढ़ी इस धरती से अपने शरीर छोड़कर गई, तभी से न तो किसी घर पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर दिखती है और न ही किसी के घर में ही उनकी तस्वीर दिखती है। आजकल तो बैठक तो ड्राइंग रूम बन गई है, जहां किसी भी स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर को स्थान नहीं मिलता है, ऐसा लगता है जैसे हमारा जीवन केवल अनैतिक कार्यों के लिए रह गया है। लोग खुद को इतना बड़ा मानने लगे है कि महान स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें कब हमारे घरों से बाहर हो गई हमे पता ही नहीं चला। युवा दोस्तों बहुत दुख होता है। हम क्या उत्साह या हौंसला भरेंगे अपने बच्चों में, हम क्या अपने बच्चों को वीरता का पाठ पढ़ाएंगे, जब हमने उनके सामने कभी नेता जी की वीरता का जिक्र तक नहीं किया है, घर में उनकी तस्वीर नहीं लगाई। घर के बाहर लिखा हुआ जय हिंद का नारा सभी के लिए प्रेरणा का पुंज होता था। आज पुनः आवश्यकता है मां सरस्वती के ज्ञान की, आज पुनः जरूरत है नेता जी सुभाष बोस के संकल्पशील इरादों की, जो युवा पीढ़ी को अंधाधुंध बढ़ते पाखंड से निजात दिला सकें, धोक मारने वाले युवाओं को ज्ञानशील बना सके, प्रश्न पूछने की ताकत भर सकें। युवा पीढ़ी को पुस्तके पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें, युवाओं को मेहनत के मायने समझा सकें। जय हिंद का अर्थ समझने के लिए खुद को हर प्रकार के लोभ लालच, बेईमानी, पक्षपात, अपराध, अन्याय से दूर रखना पड़ेगा, तभी भारत भूमि की युवा पीढ़ी जय हिंद का अर्थ समझ पाएगी। जय हिंद का मतलब है सभी का उदय हो, सर्वोदय हो, अन्तोदय हो, सर्वांगीण विकास हो, सभी को उस विकास की धारा में भागीदारी मिलें, भारत का एक एक बच्चा इस राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण हो, हर नागरिक का जीवन राष्ट्र के लिए कीमती बनें, लेकिन नैतिकया का पतन न हो, तभी नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा दिया गया जय हिंद का नारा साकार हो पाएगा। हम बसंत पंचमी को ज्ञान की देवी सरस्वती को इसलिए समर्पित करना चाहते है क्योंकि ज्ञान ही उजाला है, ज्ञान ही साहस है, ज्ञान ही निर्भीकता है, ज्ञान ही शक्ति है, ज्ञान ही बल है, ज्ञान ही राष्ट्र की शक्ति है। आओ वसंत पंचमी के दिन ज्ञान को जगाकर सभी युवा खुद को वीरता के शिखर पर पहुंचाने का प्रण लें।
जय हिंद, वंदे मातरम
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर