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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर गांव बकरियावाली कचरा प्लांट का निरीक्षण, जांच में कई खामियां आई सामने

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On the orders of the National Green Tribunal, the Bakriyawali village waste plant was inspected, and several deficiencies were revealed during the investigation

Mahendra india news, new delhi
SIRSA जिले के गांव बकरियावाली स्थित कचरा प्लांट का निरीक्षण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश पर गठित संयुक्त जांच कमेटी द्वारा किया गया। SIRSA DC के नेतृत्व में पहुंची इस टीम में पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव भारद्वाज, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड सिरसा के एसडीओ हरिप्रसाद, नगर परिषद के अधिकारी, प्लांट से जुड़े ठेकेदार व कर्मचारी शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान बकरियावाली गांव के सरपंच प्रतिनिधि विनोद कासनिया, पूर्व सरपंच हरि सिंह मंडा, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि महेंद्र बाना, किसान सुभाष कड़वासरा, समाजसेवी जगदीप गोदारा सहित आसपास के गांवों के दर्जनों ग्रामीण भी मौजूद रहे।

शिकायतकर्ता पत्रकार हनुमान पूनिया द्वारा कमेटी को पूर्व में जुटाए गए दस्तावेज प्रस्तुत किए गए तथा मौके की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाया गया। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तैयार कर NGT को भेजने का आश्वासन दिया।

निरीक्षण में सामने आई कमियां, प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान प्रथम दृष्टि में कई खामियां सामने आईं। प्लांट परिसर में पूर्व में लगाए गए तीन लेयर के पौधे पूरी तरह गायब मिले और उनकी जगह कचरे का बड़ा ढेर लगा हुआ पाया गया। कचरा डालने वाले वाहनों की सफाई के लिए बनाया गया सर्विस स्टेशन भी जर्जर हालत में मिला, जिसके आसपास दीवारों तक कचरा फैला हुआ था।

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इसके अलावा प्लांट में आने वाले कचरे की मात्रा, उसके निपटान और रीसाइक्लिंग का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। अधिकारियों ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि प्लांट में उपयोग हो रही सभी मशीनों पर अलग-अलग सब-मीटर लगाए जाएं और उनकी सुबह-शाम रिपोर्ट दर्ज की जाए। साथ ही साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार के निर्देश भी दिए गए।

ग्रामीणों ने उठाए स्वास्थ्य और पर्यावरण के मुद्दे

निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता हनुमान पूनिया व अन्य ग्रामीणों ने पर्यावरण प्रदूषण को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। किसानों ने अधिकारियों को अपनी बंजर होती जमीन भी दिखाई, जहां कचरे से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के रिसाव के कारण फसल उगना बंद हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में कैंसर, दमा और त्वचा रोग जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी जांच की मांग भी अधिकारियों से की गई। लोगों ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई उनके लिए जीवन-मरण का विषय बन चुकी है और जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, वे संघर्ष जारी रखेंगे। अब सभी की नजर संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या के समाधान की दिशा तय होगी।