जेसीडी विद्यापीठ SIRSA में एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
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जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ, सिरसा में स्थित जननायक चौ. देवीलाल शिक्षण महाविद्यालय सिरसा के प्रांगण में एक दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 'बहुविषयक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित नवाचार, अनुसंधान और ज्ञान का एकीकरण-2026' विषय पर आयोजन किया गया। जिसमें उद्घाटन सत्र के बतौर मुख्यातिथि प्रो. अरबिंद कुमार झा, इग्नू, स्कूल ऑफ एजुकेशन, न्यू दिल्ली, विशिष्ट अतिथि प्रो. निवेदिता एवं प्रो. राजकुमार, शिक्षा विभाग, डॉ. ईश्वर मलिक प्रोफेसर शारीरिक शिक्षा विभाग, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा, डॉ. मीना कुमारी चेयरपर्सन, शिक्षा विभाग, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा, प्रोफेसर रणजीत कौर शिक्षा विभाग, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा प्रो पूनम मिगलानी, प्राचार्या, नेशनल कॉलेज ऑफ़ एजुकेशनसिरसा ने शिरकत की ।
इंटरनेशनल कांफ्रेंस के मुख्य वक्ता प्रो. वेरोनिका स्टॉफ़ोवा, गणित विभाग, ट्रनावा विश्वविद्यालय, स्लोवाकिया , हंगरी से डॉक्टर चमन वर्मा, रहें। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जयप्रकाश महानिदेशक, जेसीडी विद्यापीठ सिरसा की। विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. सुधांशु गुप्ता, , प्राचार्य वीरेन्द्र कुमार, डॉ. रणजीत सिंह, डॉ. रोशन लाल, डॉ अमरीक गिल सहित अन्य महाविद्यालयों प्राचार्यगण एवं प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।सर्वप्रथम सौवेनिर का विमोचन और स्टाफ की बुक्स का अनावरण किया ।
मुख्य वक्ता प्रो. वेरोनिका स्टॉफ़ोवा ने संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि स्कूलों में केवल तकनीक (हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर) चलाना सिखाया जा रहा है, न कि 'सूचना विज्ञान' । उन्होंने जोर दिया कि छात्रों को केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि सूचना का विश्लेषक बनना चाहिए। उन्होंने शैक्षिक प्रक्रियाओं में सही और पारदर्शी शब्दावली के उपयोग की अनिवार्यता पर जोर दिया है, ताकि तकनीकी शिक्षा को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
प्रो. स्टॉफ़ोवा ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में हो रहे निरंतर विकास को देखते हुए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न विषयों की विशेषज्ञता को एकीकृत करके, यह दृष्टिकोण न केवल एआई की समझ को गहरा करता है, बल्कि नवाचार को भी गति प्रदान करता है। विविध दृष्टिकोणों का समावेश रचनात्मक प्रक्रिया को समृद्ध करता है, जिससे ऐसी उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं जो किसी एक विषय की सीमाओं के भीतर संभव नहीं हो सकतीं। इसके अलावा, एआई द्वारा उत्पन्न जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए यह सहयोगात्मक तालमेल अत्यंत आवश्यक है, जिन्हें पूरी तरह से समझने और प्रभावी ढंग से हल करने के लिए अक्सर कई क्षेत्रों की अंतर्दृष्टि की आवश्यकता होती है।उन्होंनें चैट जीपीटी द्वारा एआई का उपयोग पर चर्चा की ।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक डॉ. जयप्रकाश ने सर्वप्रथम सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बहुविषयक दृष्टिकोण की जांच का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयोग पर इसका परिवर्तनकारी प्रभाव पारंपरिक सीमाओं से कहीं अधिक व्यापक है। जैसे-जैसे एआई स्वास्थ्य सेवा, गणित, कला और कृषि जैसे विविध क्षेत्रों में एकीकृत हो रहा है, अंत:विषयक दृष्टिकोण जटिल, वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने की इसकी क्षमता को बढ़ाता है। यह व्यापक परिप्रेक्ष्य एआई को इसके पारंपरिक अनुप्रयोगों से आगे बढऩे में सक्षम बनाता है, नई संभावनाओं को खोलता है और सबसे गंभीर वैश्विक चुनौतियों को हल
