चिंकारा हिरन के बच्चे की पालूदेवी देवी बनी सहारा, 5 दिनों तक पिलाया अपना दूध, तड़पता हुआ मिला था बच्चा
राजस्थान में मां की ममता झलक आई। जहां पर इंसानियत और पर्यावरण प्रेम की मिसाल देखने को मिली।
खीचड़ों की ढाणी डूंगरी क्षेत्र में शिकारी कुत्तों के हमले में चिंकारा हिरन की मां की दर्दनाक मौत के बाद उसका शावक अनाथ हो गया। जानकारी के अनुसार हिरन का बच्चा घायल अवस्था में हिरण का बच्चा अरंडी की फसल में तड़पता मिला। घटना के बाद क्षेत्र की गृहिणी पालूदेवी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल चिंकारा शावक को अपने घर सुरक्षित रखा। कुत्तों के हमले से डरा सहमा और घायल हिरण का बच्चा जब घर लाया गया तो पूरे परिवार ने उसे अपने सदस्य की तरह अपनाया.
दूध पिलाकर दी जिंदगी
जानकारी के अनुसार पता चला है कि 5 दिन तक स्वयं धात्री होने के कारण पालूदेवी ने शावक को अपने बच्चे की तरह स्वयं का दूध पिलाकर जिंदगी। बाद में पालूदेवी ने इस पूरे घटनाक्रम की सूचना पर्यावरण एवं जीवरक्षा संस्था जालोर की सक्रिय सदस्य डॉ. इन्द्रा विश्नोई को दी।
इसकी सूचना मिलते ही डॉ. इन्द्रा विश्नोई ने तत्परता दिखाते हुए अपनी निजी गाड़ी से करीबन 65 किलोमीटर दूर अमृता देवी उद्यान धमाणा रेस्क्यू सेंटर में शावक को सुरक्षित भिजवाया, जहां पर हिरन का उपचार और संरक्षण किया जा रहा है।
आपको बता दें कि सांचौर क्षेत्र में धमाणा का गोलिया हिरण संरक्षण का मुख्य केंद्र है। इस केंद्र में पिछले कई वर्षो से हिरणों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य चल रहा है। सुरक्षित माहौल में यहां हिरण कुलांचे मारते नजर आते हैं। वर्तमान में इस केंद्र में करीबन 350 से अधिक हिरण, मोर, बंदर सहित अन्य वन्यजीव संरक्षित हैं।
