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कपास में गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए फेरोमोन ट्रैप प्रभावी, भारत सरकार की टीम ने सिरसा सहित विभिन्न जिलों में किया संयुक्त सर्वेक्षण

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Pheromone traps effective for controlling pink bollworm in cotton; Government of India team conducted a joint survey across various districts, including Sirsa

Mahendra india news, new delhi

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के निर्देशन में क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी) फरीदाबाद तथा संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) सिरसा के सहयोग से बुधवार को जिला में कपास की फसल का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के दौरान किसानों को गुलाबी सुंडी सहित अन्य कीटों के प्रभावी प्रबंधन के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों की जानकारी दी गई।

संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) डॉ. आत्मा राम गोदारा ने बताया कि तकनीकी सहायक डॉ. रोबर्ट रोबिनसन तथा क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद के अधिकारियों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर कपास की फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान जिन खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाए गए थे, वहां किसानों से फीडबैक भी लिया गया। किसानों ने बताया कि फेरोमोन ट्रैप गुलाबी सुंडी की निगरानी एवं नियंत्रण में काफी प्रभावी साबित हो रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अनेक किसानों ने अपने खेतों में बड़ी संख्या में फेरोमोन ट्रैप लगाए हैं।

उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद तथा संयुक्त कृषि निदेशक (कपास), सिरसा के सहयोग से हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद जिलों में लगभग 120 फेरोमोन ट्रैप लगाए गए हैं।

इस दौरान अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी गई कि वे खेतों में कीटों की नियमित निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इसके अलावा रस चूसने वाले कीटों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 20 पीले अथवा नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन ट्रैपों के माध्यम से खेतों में कीटों की संख्या का सही आकलन किया जा सकता है और समय रहते उचित प्रबंधन उपाय अपनाए जा सकते हैं।

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विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी (पीबीडब्ल्यू) की शुरुआती गतिविधियां देखने को मिली हैं। इसलिए किसान नियमित रूप से फेरोमोन ट्रैप एवं ल्यूर (गंध) का उपयोग करें तथा आवश्यकता पड़ने पर ही भारत सरकार के केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) द्वारा अनुमोदित कीटनाशकों का प्रयोग करें। इससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से बचा जा सकेगा और उत्पादन लागत भी कम होगी।

अधिकारियों ने किसानों को एनपीएसएस मोबाइल ऐप के उपयोग की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की पहचान, निगरानी और उनके नियंत्रण संबंधी वैज्ञानिक सलाह तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय पर उचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी तथा अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग पर रोक लगेगी।

संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान टीम ने पाया कि वर्तमान में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी एवं अन्य कीटों का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (ईटीएल) से कम है। इसलिए किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी करते हुए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई।

इस संयुक्त सर्वेक्षण दल में क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (डीपीपीक्यूएस-आरसीआईपीएमसी), फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. लक्ष्मी कांत, डॉ. के.पी. शर्मा, सुरजीत बर्मन, संयुक्त कृषि निदेशक (कपास), सिरसा के तकनीकी सहायक डॉ. रोबर्ट रोबिनसन तथा कृषि विभाग के कृषि पर्यवेक्षक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।