विभिन्न रंगों के साथ खेलने का अर्थ है खुद को लिबरल करना, खुद को सभी दैवी गुणों के साथ जोड़ना
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
आजकल लोगों के मस्तिष्क में सोचने समझने के सेल संकीर्ण होते जा रहे है, एक बड़े क्षेत्र को छोटे छोटे बाड़ों में बदलने को आतुर है, विभिन्नता को भिन्नता में तब्दील करना चाहते है, खुद सागर मानने से अलग एक बूंद के रूप में रहना चाहते है। इस दुनिया में रंग किसने दिए है, क्या कोई व्यक्ति इस तथ्य को जानने का इच्छुक होता है, शायद नहीं, क्योंकि इस धरती पर अधिकतर अपने अपने रंगों में सिमटते जा रहे है, अपने अपने छोटे छोटे दायरों में सिमटते जा रहे है।
दुनिया को रंग देने वाली शक्ति सूर्य की रौशनी है, जो अपने भीतर विभिन्न रंगों की भरमार छुपाए हुए है, जिन्हे हम बहुत आसानी से बरसात के बाद आकाश में बनने वाले इंद्रधनुष में देख सकते है। सूर्य की यही रौशनी पृथ्वी पर पड़ती है, जिसे हम ऊर्जा भी कहते है, इसी रौशनी द्वारा दिए गए रंग पृथ्वी पर पड़ते है, वही अलग अलग रंग हमारी पृथ्वी विभिन्न पौधों, पेड़ों, फूल और फल द्वारा प्रदर्शित करती है। धरती मां का यही प्रदर्शन पृथ्वी को सुंदर बनाता है, विभिन्न रंगों से सुसज्जित करती है, जिनको देखकर इस धरती पर खुशी व आनंद आता है। विभिन्न प्रकार के फूल खिलते है,
फाल्गुन के महीने में जिस प्रकार से धरती पर पीला रंग खिलता है और लाल रंग के फूल खिलते है इन्हीं दोनों रंगों का मिश्रण ही तो अग्नि में भी देखने को मिलता है, इन्हीं दोनों रंगों से केसरिया रंग बनता है। धरती पर फूलों के रंगों का प्रदर्शन विभिन्न अलग अलग रंगों के द्वारा मानव जीवन को खुशनुमा बनाते है। आज हम जो विमर्श करना चाहते है वो अलग अलग रंगों द्वारा इस दुनिया को सुंदर बनाने का काम कर रहे है वो ही हम इंसानों को आनंद प्रदान करती है।
यही रंग हमारे मस्तिष्क में विभिन्न प्रकार के विचारों को जन्म देने का कार्य करते है क्योंकि इस दुनिया में सभी कुछ सूर्य के प्रकाश एवं ऊर्जा से ही तो संभव होता है। सूर्य ही इस पृथ्वी को रौशन करने वाला है, सूर्य की गर्मी से ही पृथ्वी के सभी रत्न संभव है, ऊर्जा के सभी भंडार संभव है, सूर्य की कृपा से ही धरती पर जीवन संभव है, खाद्यान्न संभव है, पानी संभव , सभी पेड़ पौधे संभव है, गाड़ियों को चलाने वाला फ्यूल, कोयले सभी संभव है, सूर्य के कारण ही सभी खुशियां संभव है।
धरती पर जितने भी रंग दिखते है ये सूर्य के द्वारा ही संभव है। ये रंग हमे उत्साहित करते है, हमें आनंदित करते है, हमें अलग अलग देखने का अवसर देते है, ये रंग है जो हमारे विमर्श को विस्तार देते है। लेकिन कुछ महानुभाव है कि उनके विचार इतने संकीर्ण है कि उन्हें कुछ ही रंग दिखते, या उन्हें कुछ रंग ही सुहाते है, बाकी को नकारने का कार्य करते है, इससे ऐसा लगता है जैसे वो सूर्य देव को ही नकार रहे है, पृथ्वी पर जीवन को ही नकार रहे है। अब ये तो उनकी संकीर्ण विचारधारा ही बता सकती है कि उन्हें छोटा और छोटा होने में क्यों आनंद आता है, या खुद को एक रंग के साथ क्यों बांधना चाहते है,
जब हर रंग का अपना महत्व है। हर रंग अलग विचार को जन्म देता है। जब हम हरे रंग को देखते है तो धरती पर खुशहाली नजर आती है, आंखों को सकून मिलता है, इसीलिए तो सभी हस्पतालों में अधिकतर कपड़े पर्दे हरे रंग के बने होते है। सफेद रंग को देखते है तो शांति का आभास होता है, स्पष्टता नजर आती है, केसरिया रंग जो लाल और पीले रंग से बना है वो त्याग व बलिदान के लिए प्रेरित करता है, नीला रंग विस्तार को प्रदर्शित करता है, अर्थात विकास व गति का प्रतीक है, इसी प्रकार सभी रंगों का अपना महत्व है। जैसे आयुर्वेद में अलग अलग रंग की सब्जी खाने के लिए कहा जाता है, ताकि हमारी सेहत अच्छी रहें।
कितना अजीब संयोग है कि धरती से उगने वाले खाद्यान्न भी अलग अलग रंग के होते है और सभी का महत्व भी अलग अलग है। होली का त्यौहार, एवं धुलंडी का त्यौहार भी तो अलग अलग रंगों के कारण ही तो आनंद देता है, हम एक दूसरों पर रंग बिरंगे रंग डाल कर सभी की चाहतों का सम्मान करते है, सभी के स्वास्थ्य का भी ख्याल करते है, लेकिन धीरे धीरे हम अपनी इन समृद्ध परम्पराओं, त्यौहारों को भूलते जा रहे है, ये खेलते भी है तो फिर बंद दिमाग से खेलते है, रंगों की खूबसूरती को भूलकर होली का त्यौहार मनाते है। जीवन को खुशहाल रखने या जीवन को स्वस्थ रखने के लिए हर रंग का अपना महत्व है इसलिए इंसान होने के नाते हम अपनी प्रकृति का सम्मान करें, क्योंकि सभी रंग तो इस नेचर ने इसलिए दिए है और नेचर को ये रंग सूर्य देव ने दिए है।
सूर्य देव द्वारा दिए गए इन रंगों को इग्नोर करना, सूर्य के अस्तित्व को नकारने जैसा है। किसी भी इंसान को सूर्य की रौशनी मिलती है तो हम समझे है कि हमे स्वास्थ्य मिल रहा है, विटामिन डी तक ही हम उसे सीमित रखते है जब कि सभी विटामिन यहीं से संचालित है, बस यही समझने की जरूरत है, शरीर में लाल रक्त कणिकाएं भी इससे से संभव है। अगर सूर्य की किरणों को प्रिज्म में से गुजार कर देखा जाए तो भी हमे वो रंग दिखाए देते है, लेकिन हम इंसान अपने अज्ञान के कारण या किसी के कहने पर इन रंग बिरंगी खूबसूरती को इग्नोर करने का कार्य तो कर देते है लेकिन भीतर से बहुत अहंकारी व छोटा महसूस करते है। होली का त्यौहार रंगों का महत्व बताने वाला फेस्टिवल है जो हमे बताता है कि ये रंग हम सभी के लिए आवश्यक है, क्योंकि केवल एक रंग कभी भी इंसान को खुशी प्रदान नहीं कर सकता है,
क्योंकि अगर सब कुछ एक जैसा हो जाएं तो ये अनंत जगत सीमित लगने लगेगा, अगर पूरा संसार एक रंग में रंग जाए तो ब्रह्माण्ड की विशालता छोटी लगने लगेगी, इसलिए इस प्रकृति को वैसा ही स्वीकार करना चाहिए जैसी ये है, इसके विस्तृत अर्थ को समझने की जरूरत है। युवा विद्यार्थियों को अपने जीवन को इस नेचर की तरह ही विशाल रूप देने की जरूरत है, सहअस्तित्व की भावना जगाने की जरूरत है। फाग का उत्सव निश्चित रूप से हमे प्रकृति के विभिन्न रंग के साथ रहना सिखाते है, हमे सभी रंगों के महत्व का बोध कराता है। जीवन की संकीर्णता को अपने ऊपर हावी न होने दें, ताकि हमारे विचारों की विशालता इस ब्रह्माण्ड के साथ सजीव रह सकें। सूर्य देव द्वारा मिल रही विभिन्न रंगों की ऊर्जा को हम खुद के भीतर संजोए और स्वयं को प्रकृति के साथ जोड़ने का भाव रखें, यही जीवन का शुभ संदेश है, यही जीवन के लिए शुभ लाभ है।
जय हिंद, वंदे मातरम
