आलू की खेती: आलू किसानों की कमाई बढ़ा सकती हैं यह 3 किस्में, 400 क्विंटल तक उपज
mahendra india news, new delhi
आलू की बिजाई का समय शुरू हो गया है। किसानों ने आलू की बिजाई के लिए कार्य शुरू कर दिया है। अब आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए सही किस्म का चुनाव सबसे जरूरी होता है। अगर बीज की किस्म इलाके और खेती के समय के हिसाब से सही हो, तो कम वक्त में अच्छा उत्पादन मिल सकता है। इसी वजह से आलू की 3 किस्में कुफरी पुखराज, कुफरी नीलकंठ और कुफरी ख्याति किसानों के बीच चर्चा में हैं।
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार किसान अपनी जरूरत के हिसाब से इनमें से चुनाव कर सकते हैं, कुछ किस्में जल्दी तैयार हो जाती हैं, इससे किसान वक्त पर खेत खाली करके दूसरी फसल लगा सकते हैं। वहीं, कुछ किस्में अपने रंग और सेहत के लिए फायदेमंद गुणों के कारण से बाजार में अलग पहचान बना रही हैं. अच्छी पैदावार के लिए किसानों को प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही, अपने इलाके के मौसम और मिट्टी के हिसाब से सही किस्म चुनना भी जरूरी है।
इतने दिन में तैयार हो जाती है कुफरी पुखराज
कृषि विशेषज्ञ डा. सुनील बैनीवाल के अनुसार कुफरी पुखराज आलू की जल्दी तैयार होने वाली किस्मों में शामिल है. यह किस्म लगभग 70 से 90 दिनों में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है. इसकी पैदावार 350 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है, हालांकि असल उत्पादन मौसम, मिट्टी, सिंचाई और देखभाल पर निर्भर करता है. इस किस्म का फायदा उन किसानों को हो सकता है, जो कम समय में आलू की फसल लेकर खेत में दूसरी फसल लगाना चाहते हैं.
कुफरी नीलकंठ की खासियत है इसका रंग
उन्होंने बताया कि कुफरी नीलकंठ अपने खास बैंगनी-नीले रंग के कारण दूसरी किस्मों से अलग दिखाई देती है. इस आलू में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इसे सेहत के लिहाज से खास बनाते हैं. इसके अलग रंग के कारण बाजार में भी इसे पहचान मिल सकती है. हालांकि, इसकी खेती करने से पहले किसानों को स्थानीय बाजार में मांग और बिक्री की संभावनाओं का पता कर लेना चाहिए.
पहले जानें ये बातें
इसी के साथ ही कुफरी ख्याति भी आलू की उन्नत किस्मों में गिनी जाती है. इसकी खेती करने से पहले किसान अपने क्षेत्र के मौसम, मिट्टी और फसल तैयार होने की अवधि के बारे में जानकारी लें. सही किस्म का चुनाव करने से खेती की योजना बनाने और लागत का हिसाब रखने में मदद मिलती है.
बीमारी और लागत पर भी दें ध्यान
उन्होंने बताया कि आलू की किस्म चुनते समय सिर्फ पैदावार ही नहीं, बल्कि बीमारी लगने का खतरा और खेती पर होने वाला खर्च भी देखना चाहिए. अच्छे बीज, सही मात्रा में खाद, समय पर सिंचाई और फसल की सही देखभाल से नुकसान कम किया जा सकता है. यह भी ध्यान रखें कि किसी किस्म में बीमारी कम लगने की बात हर एरिया में सही हो, यह जरूरी नहीं है. इसलिए बीज किसी भरोसेमंद दुकानदार से ही खरीदें और खेती शुरू करने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।
