सरकारी टीचर लगी रचना चौहान ने नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, अब बड़े मुनाफे के साथ रचना दे रहीं दूसरी महिलाओं को रोजगार
महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। अब महिलाएं खेती में भी अपनी पहचान बनाने लगी है। इसी तरह से बरेली की रचना चौहान ने मशरूम की खेती कर पहचान बनाई है। चौहान 2020 से पहले बरेली के बेसिक शिक्षा विभाग में टीचर के पद पर तैनात थी। लेकिन अब एक अच्छी पहचान रखने वाली फार्मर बन गई हैं। मशरूम का उत्पादन करतीं हैं।
मशरूम के उत्पादन से उनका काफी नाम भी हो गया है। प्रशासन उन्हें स्थानीय स्तर के कई कार्यक्रम में सम्मानित भी कर चुका है। एक खेती पर करीब डेढ़ लाख रुपये की आमदनी होती है।
जिला पंचायतीराज विभाग में पंचायत सेकेट्री के पद पर तैनात संजीव तोमर की पत्नी रचना चौहान ने वर्ष 2007 का चयन बेसिक शिक्षा विभाग बरेली में अध्यापक के पद पर हुआ था। लेकिन पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में होने के कारण घर-परिवार को समय नहीं दे पा रहे थे। रचना चौहान ने वर्ष 2020 में अध्यापक की जॉब छोड़ दी।घर-परिवार की देखभाल के साथ ही उन्होंने खेती की और भी रुख किया।
पहले लिया प्रशिक्षण
पूर्व में वह पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से मशरूम की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी थी। इसके बाद मशरूम के उत्पादन व उसके लिए आवश्यक खाद सामग्री व उसकी मार्केटिंग के बारे में भी अच्छी जानकारी हो ली। अपनी डेढ़ दो बीघा भूमि के कुछ हिस्से में झोपड़ी बनाकर मशरूम का उत्पादन आरंभ किया। 70 हजार रुपये की लागत मशरूम देशी खाद के उपयोग से उगाना आरंभ किया। इससे उन्हें आमदनी होने लगी तो वह इसे अपग्रेड भी करतीं गई।
अब झोपड़ी से आरंभ हुआ मशरूम उत्पादन चार बड़े कमरों की पूरी यूनिट का आकार ले चुका है। अब बड़ा रूप देने में लागत तो बढ़ी लेकिन आय भी बढ़ गई है। करीब 70 दिन के अंतराल पर मशरूम का उत्पादन होने पर उन्हें उससे खर्च निकाल कर करीब डेढ़ लाख रुपये की बचत हो जाती है।
मुहैया कराया रोजगार
टीचर की नौकरी छोड़ने वाली रचना अब दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं। उनके मशरूम फार्म हाउस पर एक दर्जन से अधिक महिला व पुरुष विभिन्न स्तर पर उत्पादन का कार्य देखते हैं। कभी इनकी संख्या अधिक कार्य की स्थिति में बढ़ा भी दी जाती है।ऐसा रचना चौहान का कहना है।
रचना चौहान, मशरुम उत्पादक ने बताया कि स्कूल से अध्यापक के पद की नौकरी को छोड़कर मशरूम का कार्य किया है। करीबन डेढ़ बीघा में इसका उत्पादन 4 यूनिट में किया जाता है। 70 दिन में मशरूम तैयार हो जाती है। इससे उन्हें डेढ़ लाख की आय होती है। 12 से अधिक लोग उनके फार्म हाउस पर रोजगार से भी जुड़े हैं।
