home page

सिरसा जिला के किसान राजेराम ने तैयार की कपास की उन्नत किस्म का बीज तैयार, अगले सीजन में हरियाणा-पंजाब और राजस्थान के किसानों को मिलेगा बीज, तीन मुख्यमंत्रियों से हो चुके हैं सम्मानित

 | 
news

mahendra india news, new delhi
सिरसा जिले के गांव शाहपुर बेगू के प्रगतिशील किसान राजेराम कपास की उन्नत किस्मों के बीज तैयार कर खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2003 से कपास के संकर बीज तैयार करने में जुटे राजेराम ने अब कपास की नई किस्में तैयार की हैं। इस किस्म के बीज अगले सीजन में हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के किसानों को उपलब्ध करवाने का कार्य किया जाएगा है। किसान के अनुसार, तैयार की गई किस्मों में डीएस-5 जो सीआईसीआर-2 की किस्म हैं। सीआईसीआर-2 किस्म को एलडी 327 और डीएस-5 के क्रॉस से तैयार करके तैयार किया गया है। 

2,500 रुपये में उपलब्ध करवाया जाएगा बीज
प्रगतिशील किसान राजेराम के मुताबिक, नई किस्म का बीज अगले सीजन में किसानों को 2,500 रुपये में उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई किस्म के तैयार बीज के लिए कपास की चुगाई का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद इसके बीज निकाले जाएंगे। वहीं किसानों को बीज उपचार के बाद उपलब्ध करवाने का कार्य किया जाएगा। 
राजेराम का प्रयास है कि कपास उत्पादक किसानों को बेहतर किस्मों के बीज उपलब्ध हों और खेती में नए विकल्प मिलें। अगले सीजन में हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के किसानों तक नई किस्मों के बीज पहुंचने से कपास की खेती करने वाले किसानों को इनका लाभ मिलने की संभावना है।

तीन मुख्यमंत्रियों से हो चुके हैं सम्मानित
कपास के संकर बीज तैयार करने के क्षेत्र में योगदान के लिए राजेराम को जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी सम्मानित कर चुके हैं। लगातार नए बीज तैयार करने के प्रयासों के चलते उन्होंने कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।

WhatsApp Group Join Now

कपास की कई किस्मों पर कर चुके हैं काम
राजेराम इससे पहले भी कपास की कई किस्मों के बीज तैयार कर चुके हैं। किसान राजेराम केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र के सहयोग से नई किस्म तैयार कर रहे हैं। इनमें एचडी-589, एचडी-123, एचडी-432 और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की किस्म डीकेएफ-88 शामिल हैं। इन उन्नत किस्मों के बीज तैयार करके किसान लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं।