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कभी रेलवे फाटक उठाते थे राजू, अब बने डीएसपी, 12 घंटे काम करने के बाद बिना कोचिंग की थी तैयारी

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mahendra india news, new delhi 

हर कामयाबी की कहानी के पीछे संघर्ष की लंबी स्टोरी और अनसुनी दास्तां छिपी होती है। राजू की कहानी भी इसी जज्बे का उदाहरण है। पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियों को संभालते हुए आगे बढ़े। उन्हें हालात ने कई बार तोडऩे की कोशिश की लेकिन हर बार वह उठ खड़े हुए। सबसे पहले रेलवे में प्वाइंट्समैन की जॉब हासिल की। हालांकि, सपना अधिकारी बनने का था और उन्होंने जॉब करते हुए BPSC की तैयारी शुरू कर दी। रेल फाटक उठाने और ट्रेन के प्वाइंट्स को जोड़ने आदि की 12 घंटे की नौकरी के बाद वह तैयारी करते थे। बिना कोचिंग उन्होंने BPSC एग्जाम क्रैक किया और DSP बने। 

राजू कुमार बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं। वह एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्हें कम उम्र से ही मुश्किलों की सामना करना पड़ा। जब वह 12 साल के थे तो उनके पिता का निधन हो गया था। इससे परिवार गहरे आर्थिक सकंट से घिर गया था। पिता के जाने के बाद राजू की मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा बनीं। मुश्किलों के बाद भी उन्होंने राजू को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद राजू ने प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। अपनी पहली ही कोशिश में उन्हें रेलवे ग्रुप-D में जॉब मिल गई। उनकी पोस्टिंग प्वाइंट्समैन के तौर पर हुई थी। लगभग 5 साल से वह रेलवे में नौकरी कर रहे हैं।

राजू की रोजाना की ड्यूटी में लेवल क्राॅसिंग गेट को ऑपरेट करना यानी फाटक उठाना और ट्रेनों व गाड़ियों के सुरक्षित निकलने की जिम्मेदारी शामिल थी। वह दिनभर 12 घंटे काम करते थे। रेलवे क्राॅसिंग पर भीषण गर्मी, भारी बारिश और कड़ाके की सर्दी में भी वह रुके नहीं 

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राजू ने बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (क्चक्कस्ष्ट) की 70वीं परीक्षा के रिजल्ट में 72वीं रैंक हासिल की। उन्हें डिप्टी सुपरिटेंडेट ऑफ पुलिस  के पद के लिए चुना गया है। उन्होंने साबित कर दिया कि पक्के इरादे, स्मार्ट प्लानिग और लगातार कोशिश करते हुए आगे बढ़ा जाए तो सफलता जरूर मिलती है। DSP बनने के बाद राजू ने पूरा श्रेय अपनी मां और परिवार को दिया क्योंकि अधिकारी बनने के इस सफर में उन्हें हमेशा अपनी मां का सपोर्ट मिला