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गांव तिलोकेवाला में श्री निर्मलसर साहिब गुरुद्वारा में संत मोहन सिंह मतवाला की 34वीं बरसी पर हुआ धार्मिक समारोह

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Religious ceremony held at Sri Nirmalsar Sahib Gurudwara in village Tilokewala on the 34th death anniversary of Sant Mohan Singh Matwala
mahendra india news, new delhi

सिरसा। गांव तिलोकेवाला के श्री निर्मलसर साहिब गुरुद्वारा में संत मोहन सिंह मतवाला की 34वीं बरसीं पर लगातार एक माह से चल रहे विशाल धार्मिक समारोह का गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार संत बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला की अध्यक्षता में शनिवार को समापन हुआ। इस दौरान प्रकाश किए गए श्री अखंड पाठ साहिबों की लड़ी के भोग डाले गए। इसके उपरांत महान गुरमति समागम सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक हुआ। साथ में अमृत का बाटा तैयार किया गया। कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश पहुंची साध-संगत ने श्रद्धापूर्वक श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में माथा टेककर गुरू का लंगर ग्रहण किया।

इस विशाल समारोह को लेकर गुरूद्वारा श्री निर्मलसर साहिब में कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्री निर्मलसर साहिब के दरबार साहिब के अलावा गुरूद्वारा गांव की हर गलियों, मुख्य सडक़ों को रंग-बिरंगी झंडियों, स्वागत गेट, पंथ के झंडों, विद्युत लडिय़ों आदि से बेहद सुंदर व आर्कषक रूप से सजाया गया है। इसके अलावा कार्यक्रम में पहुंचने वाली साध संगत के लिए रहने, लंगर, चाय-पानी की व्यवस्था के साथ-साथ पार्किंग की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में तख्त श्री दमदमा साहिब से पहुंचे सिंह साहिब बाबा टेक सिंह धनौला, श्री दरबार साहिब अमृतसर से हेड ग्रंथी ज्ञानी केवल सिंहए तख्त श्री पटना साहिब से ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर-ए-मशकीन, श्री दरबार साहिब अमृतसर से हजूरी रागी जत्था, संत बाबा काका सिंह बूंगा मस्तुआना, संत बाबा प्रीतम सिंह मलड़ी, संत बाबा दर्शन सिंह दादू, संत बाबा गुरपाल सिंह चोरमार, संत बाबा शिवानंद केवल, संत बाबा केवल सिंह डेरा बाबा हकतला सरदूलगढ़ सहित हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा, गुरप्रीत सिंह झब्बर एसजीपीसी अमृतसर, बलविंद्र सिंह भूंदड़ शिरोमणि अकाली दल बादल, बीबी बलजिंद्र कौर विधायक हलका तलवंडी साबो, रवि प्रीत सिंह हलका इंचार्ज तलवंडी साबो, कालांवाली के विधायक शीशपाल केहरवाला, वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश चोपड़ा, राजेन्द्र देसूजोधा सहित एचएसजीपीसी के सदस्य मोहनजीत सिंह पानीपत, कुलदीप सिंह जोगेवाला, प्रकाश सिंह साहुवाला, बिंदर सिंह कालांवाली, गुरभेज सिंह सिरसा, अमृत पाल सिंह ओढां सहित सिंह साहिबान, रागी जत्थे व संत महापुरुष मौजूद थे।

कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के अलावा देश-विदेशों से साध संगत गुरूद्वारा में माथा टेकने के लिए पहुंची। संगत ने गुरूद्वारा निर्मलसर साहिब के पवित सरोवर डुबकी लगाई और पंज स्नान किया। रागी जत्थों ने गुरुओं की वाणी का गुणगान कर संगतों को निहाल किया। इस दौरान श्री अखंड पाठ का भोग डालकर पांच प्यारों ने दीवान हाल का नींव पत्थर रखा। सिख संगतों को संबोधित करते हुए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश झंडा ने कहा कि गुरूद्वारा निर्मलसर साहिब में संत मोहन सिंह मतवाला ने आस-पास के एरिया में खूब सेवा कर सिखी का प्रचार कर धर्म की अलख जगाई। वर्तमान में उनके बाद गद्दीनशीन गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार संत बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला समाज में बुराईयों को दूर कर धर्म की अलख जगा रहे है। संत मोहन सिंह मतवाला जी का जन्म समाज में बुराईयों को दूर करने के लिए ही हुआ था।

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संत मोहन सिंह मतवाला ने बचपन से ही सिखी की ललक पैदा होने के बाद हरियाणाए पंजाब के विभिन्न गांवों व शहरों में सिखी का प्रचार किया और शिक्षा की लहर चलाई। संत बाबा मोहन सिंह मतवाला जी ने मुक्तसर साहिब के ऐतिहासिक गुरूद्वारा तंबू साहिब में मुख्य ग्रंथी के रूप में सेवा निभाने के बाद सन् 1930-31 में गुरूद्वारा निर्मलसर साहिब का निर्माण करवाकर गांवों में जाकर सिख धर्म का प्रचार किया।

इसके बाद संत मोहन सिंह मतवाला जी ने गांव तिलोकेवाला में सिख धर्म के प्रचार के साथ-साथ खालसा प्राइमरी स्कूल की स्थापना कर लोगों को नशे, कन्या भू्रण हत्या, दहेज प्रथा, अज्ञानता, जात-पात आदि बुराईयों को दूर कर शिक्षा की अलख जगाई, जोकि वर्तमान में संत मोहन सिंह मतवाला पब्लिक स्कूल के रूप में शिक्षा से वंचित लोगों को स्कूली शिक्षा, गुरबाणी, कीर्तन, संस्कार आदि ज्ञान से पूर्ण कर रहा है। संत बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने बताया कि संत मोहन सिंह मतवाला जी की बरसी पर जो भी सिख सच्ची श्रद्वा व लगन के साथ गुरू दरबार में आकर सेवा करता है और श्री गुरू ग्रंथ साहिब के समक्ष मन्नत मांगता है। वाहेगुरू जी उसकी हर मुराद पूरी करते है। कार्यक्रम के अंत मे संत बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला आये हुए सभी संत महा पुरुषों को सिरोपा पहनाकर समानित किया। अंत मे साध संगत ने लंगर भी ग्रहण किया।