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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के‘एकात्म मानव दर्शन’ पर आधारित विश्व शांति संबंधी शोध प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित

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Research on world peace based on Pandit Deendayal Upadhyay's 'Integral Human Philosophy' published in a prestigious journal
 चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के  राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की गई है। विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राजबीर  सिंह दलाल तथा विभाग में शोधार्थी एवं यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज के समाज कार्य विभाग के प्राध्यापक  सुनील कुमार सैनी के संयुक्त शोध कार्य को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित त्रैमासिक शोध पत्रिका लोक प्रशासन  में प्रकाशित किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु  प्रो विजय कुमार  ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रकाशन न केवल राजनीति विज्ञान विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करता है, बल्कि विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को भी नई दिशा प्रदान करता है। 

इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष प्रो . राजबीर  सिंह दलाल ने बताया की   यह शोधपत्र “पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विश्व शांति संबंधी विचारों का अध्ययन” विषय पर आधारित है, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन एवं अंत्योदय के सिद्धांतों का गहन और व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। शोध में यह प्रतिपादित किया गया है कि ये सिद्धांत केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना, सामाजिक समरसता, न्यायपूर्ण विकास तथा मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।

शोध के निष्कर्षों में वर्तमान वैश्विक परिदृश्य जिसमें असमानता, संघर्ष, पर्यावरणीय संकट एवं सामाजिक विघटन जैसी जटिल चुनौतियाँ शामिल हैं का उल्लेख करते हुए यह बताया गया है कि भारतीय चिंतन इन समस्याओं के समाधान हेतु एक सशक्त एवं वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करता है। विशेष रूप से, एकात्म मानवदर्शन व्यक्ति, समाज और प्रकृति के मध्य संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक समग्र एवं व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करता है।

इसके अतिरिक्त, शोधपत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की तुलना पश्चिमी विचारधाराओं तथा गांधीवादी दृष्टिकोण से करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय दर्शन में निहित समावेशी एवं संतुलित विकास की अवधारणा आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है। शोध में यह भी दर्शाया गया है कि भारत सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में इन सिद्धांतों की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की अवधारणा को साकार करती हैं।