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रोडवेज कर्मचारियों ने किया परिवहन मंत्री के आवास का घेराव 9 जून को निर्णायक बैठक का मिला आश्वासन: पृथ्वी सिंह चाहर

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सिरसा

सिरसा। हरियाणा रोडवेज के बेड़े में निजीकरण की आहट और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने जैसी लंबित मांगों को लेकर रविवार को प्रदेश भर के रोडवेज कर्मचारी अंबाला की सड़कों पर उतरे। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के बैनर तले राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारियों ने परिवहन मंत्री के अंबाला स्थित आवास का घेराव किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद व महासचिव सुमेर सिवाच ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। प्रदेश प्रवक्ता व सिरसा डिपो प्रधान पृथ्वी सिंह चाहर ने कहा कि परिवहन विभाग को सोची-समझी रणनीति के तहत निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रोडवेज विभाग को बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिसका यूनियन कड़ा विरोध करती है। चार नए श्रम संहिताओं को कर्मचारियों पर थोपा जा रहा है, जिससे हड़ताल और सामूहिक सौदेबाजी जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा। विभिन्न विभागों की तर्ज पर रोडवेज में भी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग प्राथमिकता पर है।
नरेंद्र दिनोद व सुमेर सिवाच ने कहा कि सरकार कौशल रोजगार निगम के माध्यम से कच्ची भर्तियां कर रही है, जो युवाओं और विभाग दोनों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। "हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। कर्मचारियों के भारी आक्रोश और प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए परिवहन मंत्री स्वयं आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे।

उन्होंने कर्मचारियों की शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना और मौके पर ही ठोस आश्वासन दिया कि 9 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में रोडवेज के मास डेपुटेशन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। मंत्री ने विश्वास दिलाया कि इस बैठक में मुख्य मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा अन्य मांगों पर भी विचार किया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि 9 जून की बैठक में मांगों का लिखित समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, मंत्री के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना स्थगित कर दिया है।

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