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ऐलनाबाद हल्के के नाथुसरी चौपटा क्षेत्र में पहुंची सद्भावना यात्रा, क्षेत्रीय दलों के दम पर भाजपा का मुकाबला संभव नहीं: बृजेंद्र सिंह

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Sadbhavna Yatra reached Nathusari Chaupata area of ​​Ellenabad constituency, it is not possible to compete with BJP on the strength of regional parties: Brijendra Singh

mahendra india news, new delhi
 पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने ऐलनाबाद हलके में नाथूसरी चौपटा क्षेत्र में पहुंची सद्भाव यात्रा के दौरान कहा कि क्षेत्रीय दलों के सहारे बीजेपी का मुकाबला करना एक सभंव नही है क्योंकि क्षेत्रीय दल समाज के एक वर्ग तक सीमित होते हैं । सिर्फ कांग्रेस ही बीजेपी का मुकाबला कर सकती है जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलती हो। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में निकाली जा रही सद्भाव यात्रा रविवार को अपने 169 वें दिन ऐलनाबाद हलके में पहुंची जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। यात्रा की शुरूआत ऐलनाबाद हलके के  गांव दड़बा कलां से हुई। गांव दड़बा कलां से चौपटा, गांव  नाथूसरी, गांव गिगोरानी से होते हुए गांव कागदाना में संपंन हुई ।


कांग्रेस ही क्यों है मुख्य प्रतिद्वंद्वी
उन्होंने कहा कि बीजेपी कभी भी क्षेत्रीय दलों को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती। संसद में भी बीजेपी नेताओं का हमला ज्यादातर कांग्रेस और गांधी परिवार पर ही केंद्रित रहता है। इसका सीधा कारण यह है कि कांग्रेस एक समावेशी विचारधारा की पार्टी है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है। यही वजह है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा खतरा कांग्रेस से ही महसूस होता है। हरियाणा की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश में क्षेत्रीय दल काफी  मजबूत स्थिति में थे। ये दल एक ही राजनीतिक धारा का हिस्सा थे और सत्ता के लिए सीधा मुकाबला करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और ये क्षेत्रीय दल काफी कमजोर हो गए हैं, जिससे प्रदेश में सीधा मुकाबला दो राष्ट्रीय दल बीजेपी और कांग्रेस के बीच रह गया है।
राज्यसभा चुनाव पर उठाए सवाल
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि पहले इस तरह के चुनाव काफी सरल होते थे और विधायकों की संख्या के आधार पर सीटें तय हो जाती थीं। लेकिन अब इसमें "साम, दाम, दंड, भेद" जैसी राजनीति खुलकर सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी और लगभग अपना लक्ष्य हासिल कर लिया था, लेकिन एक वोट रद्द हो जाने के कारण उनकी योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

कांग्रेस की चुनौतियां और कमजोरियां
बृजेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कांग्रेस के भीतर भी कई कमजोरियां आई हैं। उन्होंने कहा कि लगातार तीन बार सत्ता में न आने से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर पड़ता है। 11 साल तक सत्ता से बाहर रहने के बाद अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे इस तरह की राजनीतिक घटनाएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहती थी और बीजेपी को हटाने का मन बना चुकी थी, लेकिन पार्टी अपनी कमियों के कारण उस मौके का फायदा नहीं उठा पाई। 
इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष संतोष बैनीवाल, सुभाष सरपंच, गजानंद सोनी- प्रधान सैनी समाज, वेदपाल ढिल्लों- उपाध्यक्ष केसीसी कांग्रेस, परवीन ढिल्लों, डॉ. ओम प्रकाश बेनीवाल, सुरेंद्र बिश्नोई, ओम प्रकाश दड़वा, उमेद बेनीवाल, बीरेंद्र सिंह, सत्य प्रकाश सरपंच, रणधीर सिंह, चेयरमैन गुरमेल, सुभाष कासनिया सरपंच, प्रेम शर्मा इस दौरान मौजूद रहे ।

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