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Sapna Choudhary: सपना चौधरी के साथ मारपीट करता था पति, पति को मिलने से रोका

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Sapna Choudhary: Husband used to assault Sapna Choudhary; she was prevented from meeting him

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI

DELHI की एक कोर्ट ने कलाकार और HARYANA की फेमस सिंगर सपना चौधरी को 'घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम' के तहत अंतरिम सुरक्षा निर्देश दिया है। इसके तहत उनके पति वीर साहु को अगली सुनवाई तक सपना से संपर्क करने या उनके घर, काम की जगह या फिल्म प्रीमियर वाली जगह पर जाने से रोक दिया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज, चोटों की तस्वीरें और ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया. इसके बाद अदालत ने प्रारंभिक रूप से मामले को गंभीर मानते हुए अंतरिम सुरक्षा देने का आदेश पारित किया. बता दें कि कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली डेट 25 जुलाई की दी है

जानकारी के अनुसार द्वारका कोर्ट्स की जुडिशियल मजिस्ट्रेट (महिला कोर्ट) ने सपना चौधरी की ओर से पेश वकील प्रीति सिंह की दलीलें सुनने के बाद 9 जून को यह आदेश जारी किया। अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफिसर और स्थानीय एसएचओ को आदेश दिया कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और जरूरत पडऩे पर सपना चौधरी की सहायता करें।

वकील ने अदालत को बताया कि प्रतिवादी की कानूनी पत्नी सपना चौधरी, उनके व्यवहार के कारण उनका घर छोडक़र चली गई थीं और अभी नजफगढ़, नई दिल्ली में अपने मायके में रह रही हैं।

अदालत ने दिया आदेश
कोर्ट ने सपना की शादी के बारे में उनके द्वारा जमा किए गए हलफनामे पर ध्यान दिया और कहा कि अगली सुनवाई में इससे जुड़े दस्तावेज जमा किए जाएंगे। शुरुआती तौर पर पर्याप्त सबूत मिलने पर, अदालत ने प्रतिवादी को समन जारी करने का आदेश दिया और प्रोटेक्शन ऑफिसर को घरेलू घटना रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

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सपना चौधरी को पति का डर
इस बारे में वकील ने कथित घरेलू हिंसा और उसके दोबारा होने के डर का हवाला देते हुए, एकतरफा सुरक्षा आदेश के माध्यम तुरंत अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने बताया कि सपना को 10 जून, 2026 को अपनी फिल्म 'मोमाकु' के प्रीमियर में शामिल होना था, और उन्हें डर था कि प्रतिवादी उन्हें धमका सकता है, उन पर हमला कर सकता है या सार्वजनिक रूप से हंगामा कर सकता है, इससे उनकी प्रतिष्ठा और कामों को नुकसान पहुंच सकता है। वकील ने तर्क दिया कि अस्थायी सुरक्षा आदेश देने से प्रतिवादी को कोई नुकसान नहीं होगा, जबकि इससे ंइंकार करने पर सपना की सुरक्षा और काम को नुकसान हो सकता है।