सिरसा में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का सत्संग, साध्वी स्मिधा भारती बोलीं- गुरु से सच्चा प्रेम ही शिष्य की सबसे बड़ी पूंजी
mahendra india news, new delhi
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के हुडा स्थित आश्रम, सिरसा में मासिक भंडारे के अवसर पर आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर गुरु महिमा, भक्ति एवं आध्यात्मिक विचारों का लाभ लिया। इस अवसर पर गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी स्मिधा भारती ने सूफी संत बुल्ले शाह के जीवन से संबंधित प्रसंग के माध्यम से गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब बुल्ले शाह के गुरु उनसे रुष्ट हो गए, तो गुरु से वियोग की पीड़ा में उनका हृदय व्याकुल हो उठा। अपने गुरु की प्रसन्नता पुन: प्राप्त करने और उनका स्नेह पाने के लिए उन्होंने अनेक यत्न किए। गुरु के प्रति उनका प्रेम और समर्पण इतना गहरा था कि गुरु से दूरी उनके लिए असहनीय हो गई।
साध्वी जी ने समझाया कि बुल्ले शाह का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि गुरु के प्रति सच्चा प्रेम केवल शब्दों तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें समर्पण, विनम्रता और अपने अहंकार को त्यागने का भाव निहित होता है। जब शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति वास्तविक तड़प जागृत होती है, तो वह अपने गुरु की प्रसन्नता और उनके मार्गदर्शन को ही अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मानता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य संसार के अनेक संबंधों और भौतिक उपलब्धियों में उलझकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है।
गुरु का सान्निध्य मनुष्य को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर उसके जीवन को सही दिशा देता है। इसलिए आवश्यक है कि शिष्य गुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण करे और श्रद्धा, विश्वास एवं समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़े। इस अवसर पर साध्वी चंदा भारती ने बुल्ले शाह के प्रसिद्ध भावपूर्ण भजन मैं रोवां तैनूं याद करके, सजना की प्रस्तुति दी। भजन में गुरु-वियोग की तड़प और प्रियतम के प्रति प्रेम के भावों ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर गुरु महिमा का गुणगान करते नजर आए। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखने तथा आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की। मासिक भंडारे का यह आयोजन भक्ति, सेवा, सत्संग और गुरु-प्रेम का सुंदर संगम बना।
