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डेरा जगमालवाली में सत्संग का आयोजन: मालिक की खोज बाहर नहीं, अपने अंदर करनी है: संत बिरेंद्र सिंह

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Satsang organised at Dera Jagmalwali: The search for the Lord is not outside but within oneself: Sant Birendra Singh

Mahendra india news, new delhi 
सिरसा। डेरा जगमालवाली में रविवार को सत्संग का आयोजन हुआ और हजारों की संख्या में सत्संगियों ने बड़े प्रेम से सत्संग सुना। संत ने फरमाया कि हमें बैठकर ये विचार करना चाहिए कि हमें ये जीवन किसलिए मिला है, क्या हमें ये जीवन जमीन जायदाद, व्यापार, खेती इनको जोड़ने के लिए मिला है। इस जीवन में हमें भजन सिमरन करके जन्म मरण के बंधन से छुटकारा पाना है। ये जीवन जो हमें मिला है, यह बड़ा कीमती है, लेकिन हमें इसकी कद्र ही नहीं है। संत जी ने कहा कि ये शरीर भी एक घर ही है। जिस प्रकार हम अपने घर की साफ-सफाई रखते हैं, उसी प्रकार हमें इस शरीर रूपी घर की भी सफाई रखनी चाहिए।

बिना सफाई किए वो मालिक अंदर नहीं आता। संत बीरेंद्र सिंह ने कहा कि बाहर हम चार बातें धर्म की सीख लेते हंै और लोगों को ज्ञान देना शुरू कर देते हैं। हमारे खुद के घर के अंदर तो आग लगी पड़ी है और हम दूसरों को ज्ञान देते हैं। हम मालिक की तलाश बाहर कर रहे हैं, लेकिन मालिक हमारे अंदर बैठा हुआ है, वो मालिक हमें सिमरन करने से मिलेगा।

संत ने कहा कि हम जीवन जीने के तरीके के अंदर बदलाव नहीं कर रहे हैं। अगर हमारे जीवन के अंदर शांति, ठहराव, भजन सिमरन, सत्संग नहीं है तो कहीं ना कहीं हमारे जीवन जीने के तरीके में गड़बड़ है और उसको बदलने की जरूरत है,

लेकिन हम वो तरीका बदलना ही नहीं चाहते हैं, क्योंकि ये मन कहता है कि मैं तो जैसा हूं, वैसा ही रहूंगा। लोग अहंकार में जी रहे हैं, लेकिन जिस दिन इंसान की मौत आती है, उस दिन सब कुछ यहीं छोड़ कर जाना पड़ता है, इसलिए दीनता और नम्रता के साथ जीवन जीना चाहिए। संत ने आगे कहा कि जिस तरह एक जुआ खेलने वाला अपनी सारी पूंजी हारकर उठता है, उसी तरह इंसान भी अपनी ये स्वासा रूपी पूंजी दुनिया के कूढ़ पदार्थों के अंदर हारकर यहां से रोता, चिल्लाता हुआ जाता है।

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जब इंसान को यमदूत लेने आते है तो आंखों से आंसू निकल रहे होते हैं, क्योंकि फिर पछताता है कि मेरे को भेजा किस काम के लिए था और किसमें फंसकर रह गया। संत जी ने कहा कि हमें इस दुनिया में रहते हुए सांसारिक काम भी करने हैं और उस मालिक को भी याद करना है।