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विज्ञान और प्रौद्योगिकी साथ-साथ आगे बढ़ते हैं : प्रो. पी.के. आहलूवालिया लैब से निकलकर समाज तक विज्ञान को पहुंचाना ही हमारी असली जिम्मेदारी: प्रो विजय कुमार

Science and technology progress together: Prof. P.K. Ahluwalia
Our true responsibility is to take science from the lab to society: Prof. Vijay Kumar
 
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Science and technology progress together: Prof. P.K. Ahluwalia Our true responsibility is to take science from the lab to society: Prof. Vijay Kumar

 सिरसा, 28 अप्रैल। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “एडवांसेज इन मटेरियल  साइंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (AMSET-2026)” का आज विधिवत शुभारंभ विश्वविद्यालय के एमपी हॉल ऑडिटोरियम में हुआ। सम्मेलन में देशभर से वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया।


उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स (IAPT) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. पी.के. आहलूवालिया ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन में अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर यह भ्रम रहता है कि पहले विज्ञान आया या प्रौद्योगिकी, जबकि वास्तविकता यह है कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और साथ-साथ विकसित होते हैं।प्रो. आहलूवालिया ने युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारतीय युवा केवल ओलंपिक में ही नहीं, बल्कि ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स द्वारा युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण  के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।



कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुकुलगुरु  एवं सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. विजय कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि आज के युग में नवाचार और शोध  के बिना किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने सेमीकंडक्टर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि प्रयोगात्मक और अनुप्रयुक्त  ज्ञान पर भी विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि लैब से निकलकर समाज तक विज्ञान को पहुंचाना ही हमारी असली जिम्मेदारी है।उन्होंने स्कूल स्तर पर बढ़ते नॉन-अटेंडिंग कल्चर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में बाधा बन सकती है।

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उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक स्तर से ही विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता विकसित करना आवश्यक है।कुलगुरु ने यह भी घोषणा की कि  विश्वविद्यालय में एक विशेष केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां स्कूली विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मिलकर व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक ज्ञान अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने इसे स्कूल से यूनिवर्सिटी तक ज्ञान के सेतु के रूप में विकसित करने की बात कही। कुलगुरु ने कहा की आज का युग ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का युग है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास के प्रमुख स्तंभ हैं। यदि हमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है, तो हमें शोध, नवाचार और कौशल-आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।उन्होंने आगे कहा कि असली सीख किताबों से बाहर निकलकर प्रयोगशालाओं, प्रोजेक्ट्स और समाज के साथ जुड़ने से मिलती है। हमें ‘लर्निंग बाय डूइंग’ को अपनी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाना होगा

।उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।सीडीएलयू को हम एक ऐसे ‘नॉलेज हब’ के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहां शोध, नवाचार और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल स्थापित हो।

सेमिनार के दौरान एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर बताया गया कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक, शिक्षक एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन एवं विभाग संबंधी विस्तृत जानकारी विभागाध्यक्ष प्रो. रामेहर  दीक्षित ने प्रस्तुत की।कार्यक्रम के अंत में डीन फैकल्टी ऑफ फिजिकल साइंसेज प्रो. धर्मबीर ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. सुशील कुमार, डीन रिसर्च प्रो. विक्रम सिंह, जेएनयू के प्रो. मनीष, प्रोफेसर रचना ,डीन यूएसजीएस प्रो. काशिफ किदवई, डॉ. सुखविंदर दुहान सहित अनेक प्राध्यापक एवं विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।