भूमि-जनित रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार जरूरी: डा. बी.डी. यादव
mahendra india news, new delhi
सिरसा। भूमि में अनेक प्रकार के फफूंद, बैक्टीरिया व अन्य सूक्ष्मजीव होते हैं, जो उगते हुए पौधों की जड़ों पर प्रहार करते हैं। इसके प्रकोप से पौधों में पानी व खुराक का संचार बाधित हो जाता है। जिससे पौधे की जड़ें काली पड़ जाती है और पौधें पीले पड़कर सुखने लगते हैं। भूमि-जनित रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार ही एक मात्र हल है, जो जरूरी है।
यह बात सेवानिवृत कृषि वैज्ञानिक व ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने कृषि विभाग ओढ़ां के तत्वावधान में डॉ. पवन कुमार की देखरेख में खंड ओढां के गांव किंगरे में आयोजित गोष्ठी में कही। ग्वार फसल पर प्रशिक्षण शिविर में किसानों को सही समय पर बिजाई, बीजोपचार, संतुलित खाद का प्रयोग व अनावश्यक खरपतवारनाशक दवाई न प्रयोग करने की जानकारी दी। ग्वार विषेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने बताया कि इस क्षेत्र में जड़गलन रोग काफी बढ़ता जा रहा है और किसानों से रूबरू होने से पता चला कि इस बीमारी व इसकी रोकथाम के बारे में कुछ ही किसानों को जानकारी है।
कृषि अधिकारी की विशेष सलाह:
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. पवन कुमार ने किसानों को सलाह दी किसी भी फसल की बिजाई से पहिले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवष्य करवाएं तथा खाद का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें। मिट्टी जांच से यह पता चलता है किस जमीन में कौन से पोषक तत्व की कमी है। इसके अलावा उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने पर विशेष जोर दिया तथा विभिन्न प्राकृतिक उत्पाद जीवामृत तैयार करने की लिए विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
कैसे करें बीज का उपचार:
जड़गलन रोग की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रतिकिलो बीज की दर से सुखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
कौनसी किस्मों की करें बिजाई:
इस गांव के क्षेत्र में पानी की कमी है इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि ग्वार की उन्नतशील किस्में एचजी 365 व एचजी 563 की ही बिजाई करें। ये किस्में 85 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने बताया कि ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए अपने खेत में गोबर की खाद 2-3 साल में अवश्य डालें इससे जमीन की उरर्वाशक्ति बनी रहेगी।
बिजाई का उचित समय:
जिस किसान के पास अच्छी गुुणवता वाला पानी उपलब्ध है तो ग्वार की बिजाई मानसून की बारिश आने से पहले कुछ रकबे में पानी लगाकर जून पहले पखवाड़े में रिस्क को कम करने के लिए पलेवा करके बिजाई कर सकते हैं। परन्तु ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उचित है। बारिश पर आधारित बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें।
इस अवसर पर शिविर में 60 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन बीज उपचार की दवाई तथा एक मास्क हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ से मुफ्त दी गई। इस अवसर पर प्रश्नोत्तरी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पांच किसानों को सही जवाब देने पर सम्मानित किया गया। इस प्रोग्राम को सफल बनाने में गांव के प्रगतिशील किसान सतपाल सिंह का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा जसवन्त सिंह, जयकरण, गुरूदेव सिंह, बलदेव सिंह, नायबसिंह आदि किसान मौजूद रहे
