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जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, अनुप्रयोग एवं करियर अवसर” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

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Seminar on “Geospatial Technology, Applications and Career Opportunities” organized

mahendra  india news, new delhi

चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के भूगोल विभाग द्वारा स्काईलाइन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइंफॉर्मेटिक्स, रोहतक के सहयोग से “जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, अनुप्रयोग एवं करियर अवसर” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन सी. वी. रमन भवन स्थित सेमिनार हॉल में किया गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. धर्मवीर सिंह के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार तथा विषय विशेषज्ञों का स्वागत किया और संगोष्ठी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।


मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने अपने संबोधन में एकात्म मानव दर्शन एवं इंटिग्रल ह्यूमनिज़्म पर विचार रखते हुए कहा कि तकनीकी उन्नति के साथ मानवीय मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “हम सबसे पहले मानव हैं” और समस्त मानवता एक परिवार है। भाईचारा, सार्वभौमिक मानवीय मूल्य एवं परस्पर सहयोग ही समाज को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने बल दिया कि केवल क्षमता और रचनात्मकता पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।


विषय विशेषज्ञ के रूप में स्काइलाइन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइंफॉर्मेटिक्स, रोहतक के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. रविन्द्र नाथ तिवारी ने जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग शहरी नियोजन, कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा स्मार्ट सिटी विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में उभरते करियर अवसरों की जानकारी देते हुए कहा कि जियोइंफॉर्मेटिक्स भविष्य की तकनीक है, जो रोजगार और नवाचार के असीम अवसर प्रदान करती है।

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स्काईलाइन इंस्टीट्यूट की कोऑर्डिनेटर अनु श्योराण ने अपने व्याख्यान में कहा कि जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या समाधान की एक प्रभावी विधा है। उन्होंने विद्यार्थियों को कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं उद्योग-शिक्षा समन्वय की महत्ता समझाते हुए कहा कि सही दिशा, समर्पण और निरंतर अभ्यास से युवा इस क्षेत्र में उत्कृष्ट करियर बना सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश युवाओं को अधिक सक्षम एवं जिम्मेदार नागरिक बनाता है।


कार्यक्रम में गणित विभाग की अध्यक्ष डॉ नीलम सहित विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में भूगोल विभाग के डॉ गुलाब सिंह, डॉ मीनाक्षी, डॉ कृष्णा देवी, सुनील कुमार, हर्ष कुमार, प्रमोद कुमार, कविता, सतबीर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।