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स्वयं सहायता समूह से जुडकऱ शारदा की बदली जिंदगी, अब खुद बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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Sharda's life transformed after joining a self-help group; she has now become an example of self-reliance

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
सिरसा जिले के गांव जमाल की रहने वाली शारदा ने स्वयं सहायता समूह से जुडकऱ न केवल अपने जीवन में बदलाव लाया,  बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। वर्ष 2019 में शारदा ‘बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी। समूह से जुडऩे से पहले उनके पास अपनी आय का कोई साधन नहीं था। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।


शारदा ने बताया कि जब वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, तब उनके पास अपना रोजगार शुरू करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे। समूह के माध्यम से उन्हें शुरुआती सहयोग के तौर पर 10,000 रुपये का ऋण मिला। इस आर्थिक सहयोग ने उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा किया और उन्होंने अपना रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया।


समूह से जुडऩे के बाद शारदा ने सिलाई का काम शुरू किया। वर्ष 2021 में उन्होंने लगभग 50,000 रुपये की पूंजी लगाकर मनिहारी की दुकान भी शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने धीरे-धीरे अपने रोजगार का विस्तार किया। समूह से उन्हें 1,00,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने मनिहारी की दुकान और सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने के लिए किया। इसके अलावा बैंक ऋण लेकर उन्होंने भैंस खरीदकर पशुपालन का कार्य भी शुरू किया।
शारदा ने सिलाई के कार्य में भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

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उन्होंने भSड-बकरी पालन का प्रशिक्षण लिया तथा ब्यूटी पार्लर का कार्य भी सीखा, जिससे उन्हें अपनी आय के अतिरिक्त साधन विकसित करने में मदद मिली। उनके द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों से आज वह लगभग 20,000 से 25,000 रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं।


शारदा की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है। वह अपने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन तथा सीआरपी टीम से भी जुड़ी हुई हैं और समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार तथा आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आगे बढऩे का आत्मविश्वास और नई दिशा मिली।
शारदा की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुडकऱ शारदा ने घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भरता, नेतृत्व और सम्मान की नई पहचान बनाई है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे की प्रेरणा बन रही है।