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SIRSA डेरा सच्चा सौदा की नई पहल, थैलेसीमिया मरीजों को मिलेगा नियमित रक्त

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Sirsa: Dera Sacha Sauda's new initiative—Thalassemia patients to receive regular blood supply
MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विश्व रक्तदाता दिवस इस बार उम्मीद की नई किरण लेकर आया। HARYANA NEWS, पूज्य गुरु संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा जी के आह्वान पर सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा ने देशभर व विदेशों में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत साध-संगत ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार समय-समय पर रक्तदान करेगी, ताकि किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशान न होना पड़े। अभियान की शुरूआत SUNDAY को पंजाब के पटियाला स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा SIRSA एवं मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी नुरानी धाम तथा शाह सतनाम JI स्पेशलिटी अस्पताल में स्थापित पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर में आयोजित विशेष रक्तदान शिविरों से हुई। शिविरों में बड़ी संख्या में सेवादारों ने रक्तदान कर इस मुहिम का समर्थन किया।
उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अब तक 33 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान कर मानवता सेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है।
इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि थैलेसीमिया जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को जीवनभर नियमित रक्त की आवश्यकता होती है। कई बार समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में SIRSA डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत उनके लिए संबल बनेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्त उपलब्ध करवाएगी। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों की केवल रक्तदाता के रूप में नहीं, बल्कि संरक्षक और परिवार के सदस्य की तरह मदद करें। उनकी देखभाल और सहयोग इस प्रकार किया जाए कि मरीजों को कभी अकेलापन महसूस न हो। उन्हें यह एहसास हो कि साध-संगत ने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनकी हर जरूरत और रक्त की आवश्यकता की जिम्मेदारी उठा कर एक तरह से गोद ही ले लिया है तथा पूरा डेरा परिवार हर समय उनके साथ खड़ा है।
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उन्होंने कहा कि इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में साध-संगत की अलग-अलग रक्तदाता टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें अपने क्षेत्र के थैलेसीमिया मरीजों का डाटा तैयार कर नियमित रूप से उनके संपर्क में रहेंगी। जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, टीम के सदस्य तुरंत रक्तदाताओं की व्यवस्था कर मदद पहुंचाएंगे। इससे मरीजों को रक्त के लिए अस्पतालों और ब्लड सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा समय पर उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे नियमित रक्तदान को सेवा का हिस्सा बनाएं और टीम बनाकर निरंतर इस अभियान से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर आगे आए तो कोई भी मरीज रक्त के अभाव में परेशान नहीं होगा।

- साध-संगत में दिखा खासा उत्साह
नई पहल को लेकर साध-संगत में खासा उत्साह देखने को मिला। रक्तदान शिविरों में युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ सेवादारों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सेवादारों ने भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने और थैलेसीमिया मरीजों की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

- हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जिसमें मरीजों को निश्चित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में नियमित रक्त उपलब्ध कराने की यह पहल हजारों मरीजों के लिए राहत का कारण बन सकती है। सामाजिक सरोकार और स्वास्थ्य सेवा को जोड़ने वाली इस मुहिम को मानवता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे देशभर के थैलेसीमिया मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।