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Success Story: यूट्यूब से मिला आइडिया, इस विदेशी फल की खेती ने बना दिया किसान को मालामाल

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 Success Story: यूट्यूब से मिला आइडिया, इस विदेशी फल की खेती ने बना दिया किसान को मालामाल
Success Story: यूटयूब पर आजकल लोग कई सारी वीडियोज देखते है। कई लोग इन वीडियोज से आइडिया लेते है तो कई सिर्फ मनोरंजन के लिए ही देखते है। लेकिन यूट्यूब के एक आइडिए ने उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले किसान सीमांत मिश्रा की किस्मत बदल दी। इस आइडिए से किसान ने विदेशी फल की खेती में इंटरक्रॉपिग तकनीक के इस्तेमाल से अच्छी खासी कमाई करना शुरू कर दिया।   

जानकारी के मुताबिक, भदोही के कुरौना के रहने वाले किसान सीमांत मिश्रा ने बागवानी में एमएससी की डिग्री ले रखी है। अपने स्नातकोत्तर के दौरान उन्होंने अपने पिता के साथ भदोही में ICAR- कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया और आईसीएआर-केवीके वैज्ञानिकों, यूट्यूब, समाचार पत्रों और जिला बागवानी कार्यालय सहित अलग-अलग स्रोतों से ड्रैगन फ्रूट की खेती  के बारे में सीखा और फिर उन्होंने संस्थान से मिली जानकारी और कौशल के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने का फैसला किया।

जुलाई 2022 में मिश्रा ने मिर्ज़ापुर के एक किसान से ड्रैगन फ्रूट  की 488 कलमें खरीदीं और अपने 0.25 हेक्टेयर खेत क्षेत्र का उपयोग करके 111 सीमेंटेड खंभों  पर 444 पौधे लगाए। आमतौर पर, ड्रैगन फ्रूट रोपाई के बाद दूसरे वर्ष में फूलना शुरू कर देता है,

इसलिए पहले वर्ष के लिए, वह पंक्तियों के बीच खाली जगह का उपयोग करने के बारे में चिंतित थे। इसके बाद उन्होंने आईसीएआर-केवीके विशेषज्ञों से परामर्श किया जिन्होंने आजीविका के लिए ज्यादा आय पैदा करने के लिए विविध अंतरफसल  का सुझाव दिया।

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इसके अलावा किसान बाप बेटे की जोड़ी रोजाना 20-30/किग्रा गेंदे के फूल बेचती थी और तीन महीने फूल बेचकर उन्होंने 25,000 रुपये की कमाई की। खरीदे गए पौधों की लागत, खेती की लागत और खेत से संबंधित खर्चों में कटौती के बाद, उन्होंने 15,000 रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ।

उन्होंने इंटरक्रॉपिंग के रूप में गेंदा के साथ पंक्तियों में ड्रैगन फ्रूट को सफलतापूर्वक लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 22-25 उच्च गुणवत्ता वाले फल मिले। उन्होंने इस मॉडल को दोहराने का फैसला किया और नवंबर 2023 में 3500 गेंदे के पौधे लगाए। टमाटर, मिर्च, धनिया और कशुरीमेथी जैसी अन्य फसलें अलग से लगाई गईं। आस-पास के गांवों के किसानों और युवाओं ने खेतों का दौरा किया और इस पद्धति को अपनाया।