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CDLU Sirsa में सुनील जागलान का व्याख्यान, ग्रामीण सर्वेक्षण और सामाजिक सुधार के तरीकों पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

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Sunil Jaglan delivers a lecture at CDLU Sirsa; raises student awareness about rural surveys and methods for social reform

 चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज के अंतर्गत बैचलर ऑफ सोशल वर्क विभाग द्वारा 'टेक्नीक्स आफ सर्वे एण्ड कम्युनिटी असेसमेंट इन रूरल एरियाज फ्रोम ए सोशल वर्क प्रोस्पेक्टिव' पर एक एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भवन के सेमिनार हॉल में किया गया। यह अकादमिक कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन एवं यूएसजीएस के डीन प्रो. मोहम्मद काशिफ किदवई के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात समाज सेवी और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित 'सेल्फी विद डॉटर' अभियान के संस्थापक तथा बाल एवं महिला कार्यकर्ता सुनील जागलान उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के प्रारंभ में संकाय के प्राध्यापकों द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। अपने व्याख्यान में वक्ता सुनील जागलान ने सोशल वर्क के विद्यार्थियों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं और वहां की जमीनी चुनौतियों से अवगत करवाया। उन्होंने रेखांकित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी सामाजिक सुधार या कल्याणकारी योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने से पहले व्यावहारिक सर्वेक्षण और सामुदायिक मूल्यांकन बेहद अनिवार्य कदम हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों के साथ ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने के प्रभावी और व्यावहारिक तौर-तरीके साझा किए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण समाज में व्याप्त गंभीर मुद्दों, जैसे बाल विवाह का उन्मूलन, बच्चों का यौन शोषण, बढ़ता साइबर अपराध, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषय तथा 'गाली बंद घर' जैसे सामाजिक सुधार अभियानों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने इन संवेदनशील विषयों पर डेटा एकत्र करने के वैज्ञानिक आयामों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से अधिक संवेदनशील होने और समाज जीवन में एक सजग प्रहरी के रूप में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

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इस व्याख्यान में विभाग के सभी छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। व्याख्यान के अंतिम चरण में एक संवादात्मक सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें जिज्ञासु विद्यार्थियों द्वारा व्यावहारिक कठिनाइयों पर पूछे गए प्रश्नों का मुख्य वक्ता द्वारा तार्किक समाधान किया गया। इस कार्यक्रम का समन्वय विभाग के प्राध्यापक सुनील सैनी द्वारा किया गया, जबकि इसे अकादमिक रूप से सफल बनाने में विभाग के संकाय सदस्यों प्राध्यापक ललिता, चंद्रवीर, विनोद कुमार तथा कविता रानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए विद्यार्थियों द्वारा मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न स्वरूप एक पौधा भेंट कर धन्यवाद प्रेषित किया गया और विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।