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द्वादश मंत्र युक्त सूर्य नमस्कार के आसन विन्यास से तन-मन और आत्मा का त्रिविध जागरण होता है: योगाचार्य स्वामी विज्ञानानंद

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फतेहाबाद । दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्वारा स्थानीय अल्फा इंटरनेशनल सिटी पार्क नंबर 1 में आयोजित अपने स्वास्थ्य जाग्रति कार्यक्रम आरोग्य के अंतर्गत तीन दिवसीय विशाल विलक्षण योग शिविर के तृतीय दिवस संस्थान की ओर से आशुतोष महाराज के शिष्य योगाचार्य स्वामी विज्ञानानंद ने उपस्थित योग साधकों को योग के प्राण सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराते हुए बताया कि सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है

 

। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। 'सूर्य नमस्कार' स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है। जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है। सूर्यनमस्कार को आधुनिक समय की योगिक प्रथाओं का एक हिस्सा माना जाता है, हालांकि इसे न तो आसन माना जाता था और न ही पारंपरिक योग का हिस्सा माना जाता था। नियमित गतिविधियों की शुरूआत करने से पहले सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से अभ्यासी को स्फूर्ति मिलती है और पूरा दिन ऊजार्वान महसूस होता है।

 

 आसनों के ऐसे चमत्कारी समूह में प्रत्येक आसन में गतिशील श्वास श्रृंखला भी शामिल है और यह आसन और प्राणायाम को शामिल करते हुए पूर्ण अभ्यास का एक रूप देता है। सूर्य नमस्कार अभ्यास में कुल 12 आसन और एक चक्र में 24 चरण होते इस समीक्षा में, हम प्रकाशित शोध के आधार पर शरीर के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर इसके प्रभावों को उजागर करते हुए सूर्य नमस्कार के महत्व पर जोर देते हैं। इसके अलावा, पूरे शरीर के लिए एक संपूर्ण साधना के रूप में सूर्य नमस्कार की उपयोगिता पर जोर दिया गया है।

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सूर्य नमस्कार सम्पूर्ण शरीर के स्वास्थ्य के लिए एक योगिक अभ्यास है। इसका विभिन्न ग्रंथियों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यह शारीरिक स्तर से लेकर बौद्धिक स्तर तक काम करता है। जीवन के सभी चरणों में महिलाओं के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य औषधि है। सूर्य नमस्कार शरीर, श्वास और मन का सम्पूर्ण समन्वय है। पर्यावरण संरक्षण पर बाल देते हुए स्वामी विज्ञानानंद ने योग साधकों को पानी बचाने और पौधे लगाने की प्रेरणा भी दी। सभी साधकों ने स्वामी जी से विधिवत मंत्रों सहित सूर्य नमस्कार के साथ मंडूकासन, दंडासन , विविध प्राणायाम का अभ्यास सीख कर अजीवन योग और प्राणायाम करने का शिव संकल्प भी धारण किया। कार्यक्रम में संजीव मोंगा, ललित मेहता, दिनेश मेहता, राजेश दुआ, अरिहरण, सोनू, केशव, हरी चरण, संदीप, मीनाक्षी मोंगा, शिप्रा मेहता, विराट, विराज और मनिका की सहर्ष उपस्थिति रही।