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शिक्षा नीति और पुरानी पेंशन बहाली जैसे सांझी मांगो के समाधान के लिए Punjab और HARYANA के अध्यापक हुए एकजुट

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Teachers from Punjab and Haryana united to resolve common demands like education policy and restoration of old pension

mahedra india news, new delhi
 पंजाब और हरियाणा की 2 प्रमुख अध्यापक संगठनों — डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (D.T.F.) पंजाब और डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (D.S.T.A.) हरियाणा — द्वारा चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता डी.टी.एफ. पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम देव सिंह और D.S.T.A. हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मोर ने की।

बैठक में दोनों राज्यों के स्कूल अध्यापकों तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े साझा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि दोनों संगठन शिक्षा नीति, अध्यापकों पर जबरन थोपी जा रही टी.ई.टी. परीक्षा और पुरानी पेंशन की बहाली जैसे मुद्दों पर संघर्षी साझेदारी को और मजबूत करेंगे। साथ ही इस संघर्ष में अन्य राज्यों की अध्यापक संगठनों को भी लामबंद करने के प्रयास किए जाएंगे। इस अभियान की शुरुआत के रूप में 24 मई 2026 को चंडीगढ़ में दोनों संगठनों की प्रांतीय, जिला और ब्लॉक स्तर की लीडरशिप की संयुक्त कन्वेंशन बुलाई गई है। 

डी.एस.टी.ए. हरियाणा के महासचिव सुनील यादव और डी.टी.एफ. पंजाब के संयुक्त सचिव मुकेश कुमार ने बताया कि कन्वेंशन के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री, पंजाब के मुख्यमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत मांग-पत्र भेजा जाएगा। इस मांग-पत्र के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की जाएंगी: केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के अधिकारों को कुचलकर गैर-जनतांत्रिक तरीके से लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को तुरंत रद्द किया जाए और स्कूली सिलेबस में किए गए गैर-तार्किक एवं अवैज्ञानिक बदलावों को भी वापस लिया जाए। केंद्र सरकार की भाजपा सरकार लगातार शक्तियों का अधिक केंद्रीकरण कर रही है और सभी क्षेत्रों में देशी-विदेशी कॉर्पोरेटों के हितों के अनुसार निजीकरण एजेंडे को तेजी से लागू कर रही है। पंजाब की 'आप' सरकार और हरियाणा की भाजपा सरकार भी केंद्र की इसी नीति पर चल रही हैं।

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डी.एस.टी.ए. के प्रदेश चेयरमैन धर्मेंद्र ढांडा तथा डी.टी.एफ. के प्रदेश उपप्रधान गुरप्यार कोटली और राजीव कुमार बरनाला ने संयुक्त रूप से मांग की कि: सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में देश भर के स्कूल अध्यापकों पर जबरन थोपी गई अध्यापक योग्यता परीक्षा (टी.ई.टी.) को रद्द करवाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें रिव्यू पेटीशन दायर करें। अध्यापक को भर्ती के समय की सेवा शर्तों के अनुसार सीनियरता आधारित प्रमोशन और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून-2009 में आवश्यक संशोधन बिल संसद से पास किया जाए।

शिक्षा को भारतीय संविधान की समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची में डाला जाए, ताकि राज्य सरकारें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार वैज्ञानिक आधार पर अपनी शिक्षा नीति तैयार करके लागू कर सकें। कॉर्पोरेट केंद्रित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एन.पी.एस.) और यूनिफाइड पेंशन प्रणाली (यूपीएस) को रद्द करके कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली जी.पी.एफ. आधारित पुरानी पेंशन प्रणाली को तुरंत बहाल किया जाए।

इस मौके पर दल सिंह बनवाला, रविंदर कुमार, संदीप गोयल, सुखदेव डानसीवाल, डॉ. हरदीप टोडरपुर (महासचिव, डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन), अमरीक सिंह मोहाली, शिव शंकर शर्मा, रोमी सफीपुर और प्रदीप बंसल सहित अन्य नेता भी उपस्थित रहे।