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जूते पर टिका है 160 पुराना रेलवे पुल, 17 पिलर बनाने का निर्णय, ब्रिटिश इंजीनियरों के सामने पिलर नंबर 13 को लेकर खड़ी हो गई परेशानी

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mahendra india news, new delhi

देश में अनेक जगह पर रेलों पुलों का निर्माण कार्य किया गया है। देश के अंदर कुछ ऐतिहासिक पुल भी है। इनमें रेलवे के सैकड़ों सालों के पुराने पुल हैं, जो कि मौजूदा समय में भी संचालित हैं। हालांकि हैरान करने वाली बात बता दें कि यूपी के प्रयागराज में स्थित प्रयागराज को नैनी से जोडऩे वाला यमुना रेलवे पुल जूते के आकार वाले पिलर पर टिका हुआ है।

आपको बता दें कि यह पिलर पूरी तरह एक जूते के आकार में बना हुआ है, इसके बनने की कहानी भी बहुत ही दिलचस्प है। पुल का निर्माण कार्य अंग्रेजों द्वारा किया गया था, लेकिन उस वक्त एक ऐसी घटना हुई, इसके बाद अंत में अंग्रेजों ने इस एक पिलर को जूते के आकार में बना दिया और पुल बनकर तैयार हो सका।

इस वर्ष तैयार हुई थी योजना 
रेलवे पुल बनाने के लिए प्रयागराज में बने यमुना लोहे ब्रिज के निर्माण की स्कीम 1855 में तैयार की गई थी। हालांकि, 1857 की क्रांति के बाद इस स्कीम को तत्कालीन गवर्नर रहे लॉर्ड कैनिंग द्वारा बंद करवा दिया गया। इसके बाद इसका 1859 में शुरू हुआ काम, 

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आई बड़ी परेशानी 
इस रेलवे पुल का निर्माण कार्य 1859 में शुरू हुआ था। इस दौरान पुल के 17 पिलर बनाने का फैसला लिया गया। हालांकि, निर्माण के दौरान ब्रिटिश इंजीनियरों के सामने पिलर नंबर 13 को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पिलर को बनाने के दौरान यह बार-बार नदी के तेज बहाव में बह जाता था। ऐसे में इंजीनियर्स परेशान हो ये। ब्रिटिश इंजीनियरों ने बहुत सोच-विचार करने के बाद पिलर के डिजाइन में बदलाव करने का फैसला लिया। 

कहा जाता है कि इंजीनियरों ने इसका डिजाइन जूते के आकार की तरह कर दिया, इसके तहत इसका अगला हिस्सा काफी आगे बढ़ा दिया गया। इससे पानी का बहाव कट गया था। ऐसे में पुल 15 अगस्त, 1865 को निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। पिलर नंबर 13 को ही बनने में करीबन बीस महीने का वक्त लगा था। यह जूते के आकार में बन गया। आज इस पुल को 160 वर्ष हो गए हैं। इस पुल के ऊपर ट्रेन, बीच में सडक़ यातायात और नीचे नांवें चलती हैं।