प्राचीन कागदाना मंदिर में धूमधाम से मनाया 216वां स्थापना महोत्सव
Mahendra india news, new delhi
प्राचीन मन्दिर श्री बाबा रामदेव जी महाराज, कागदाना में माघ सुदी दशमी को 216वां स्थापना महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पूरे मंदिर परिसर को विभिन्न प्रकार के फूलों व विद्युत लडिय़ों से सुसज्जित किया गया। मंदिर के पुजारी अशोक पारीक ने बताया कि सुबह 7.15 बजे श्रृंगार आरती के पश्चात बाबा को छप्पन भोग लगाकर भंडारे का शुभारंभ किया गया, जोकि बाबा की ईच्छा तक चलता रहा। भजन गायक पटेल मालिया द्वारा अपनी मधुर वाणी से बाबा की महिमा का भजनों के माध्यम से गुणगान किया गया।
मंदिर में अनेक प्रकार की झांकियां भी निकाली गई। भक्तों द्वारा चांदी के छत्र व सवामणि का प्रसाद बाबा को अर्पित किया गया। वहीं मेला गाऊड में बच्चों के लिए झूले, खिलौने, मिठाईयां व फलों की दुकानों ने मेले की शोभा बढ़ाई। सुरक्षा की दृष्टि के मद्देनजर नाथूसरी चौपट। थाना प्रभारी प्रदीप कुमार अपनी पूरी टीम के साथ मन्दिर परिसर और मेला गाऊंड की सुरक्षा सुनिश्चित की।
समस्त ग्रामीणों व मुख्य रूप से युवाओं और महिलाओं ने मंदिर में सुचारू रूप से व्यवस्था बनाने के लिए सहयोग किया। मन्दिर संस्थापक लाला रतीराम भोलूसरिया परिवार ने पुलिस कर्मियों व युवाओं तथा महिलाओं का सहयोग के लिए धन्यवाद करते हुए उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर लाला रतीराम भोलूसरिया परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे।
ये मंदिर निर्माण का इतिहास:
उन्होंने बताया कि बाबा श्री रामदेव मन्दिर, कागदाना की स्थापना लाला रत्तीराम भोलूसरिया परिवार के पूर्वजों द्वारा सन् 1811 में को गई। इतिहास बारे जानकारी देते हुए बताया कि एक समय जब भोलूसरिया परिवार के पूर्वज अपने गांव भोलूसर (राजस्थान) से सिरसा जा रहे थे, तब रात्रि विश्राम के लिए गांव कागदाना में ठहरे। तब रात्रि स्वप्न में बाबा रामदेव जी ने स्वयं उन्हें दर्शन दिए और आदेश दिए कि गांव कागदाना में जिस स्थान पर आपको मेरे घोड़े के खुरों (पैर) के निशान मिले, उसी स्थान पर आप मेरे मन्दिर की स्थापना करो। रत्तीराम मुरलीधर भोलूसरिया के पूर्वजों को बाबा के बताए गए उस स्थान पर घोड़े के खुरों के निशान मिले, उसी स्थान पर बाबा रामदेव जी के आदेशानुसार इस प्राचीन मन्दिर की स्थापना माघ शुदि दसमी विक्रम सम्वत् 1868 (सन् 1811) को की गई। स्थापना के दिन से आज तक इस मन्दिर परिसर में निर्माण एवं रख-रखाव का कार्य बाबा की कृपा से रतीराम मुरलीधर भोलूसरिया परिवार के द्वारा किया जाता है। अन्य किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा इस मन्दिर परिसर में निर्माण एवं रखरखाव के लिए किसी भी प्रकार का दान आदि नहीं लिया जाता।
