डेरा जगमालवाली में पूज्य मैनेजर साहिब जी का जन्मदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया
डेरा जगमालवाली में परम पूज्य संत मैनेजर साहिब जी के पावन जन्मदिवस के अवसर पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक सत्संग में संत बीरेंद्र सिंह जी ने संगत को आध्यात्मिक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में पूज्य मैनेजर साहिब जी के आदर्शों को अपनाना चाहिए। देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में श्रद्धालु डेरा पहुँचे और सत्संग का लाभ उठाया। संगत ने पूज्य मैनेजर साहिब जी के जीवन पर आधारित भजन और भक्ति गीतों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की।

संत बीरेंद्र सिंह जी ने अपने प्रवचन में कहा कि पूज्य मैनेजर साहिब जी ने हमेशा सच्चाई, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इंसान पूरी उम्र धन-दौलत और सांसारिक सुख-सुविधाएँ जुटाने में लगा रहता है, परंतु जब समय आता है, तो यही धन-दौलत साथ नहीं जाती। उन्होंने कहा कि इस संसार में संत इसलिए आते हैं ताकि हमें सच्चा मार्ग दिखा सकें, और हमें यह समझा सकें कि असली पूँजी तो राम-नाम की है। यही पूँजी हमें इस लोक में भी सहारा देती है और मालिक की दरगाह में भी साथ जाती है।
संत जी ने कहा कि जो समय बीत गया, वह कभी वापस नहीं आता। उन्होंने संगत को जागरूक करते हुए कहा कि एक बार जो सांस चली गई, वह दोबारा नहीं आती। इसलिए समय रहते अपनी जिंदगी की कद्र करो और हर पल का सदुपयोग करो। उन्होंने कहा कि हम सब भीतर से मैल से भरे हुए हैं — हमारे मन में निंदा, द्वेष और नफरत भरी हुई है। अगर हमें अपने अंतर में सतगुरु को बसाना है, तो सिमरन करना पड़ेगा ।
संत ने कहा कि सतगुरु को पाने का रास्ता सिमरन से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे में से कम से कम 2 घंटे सतगुरु को याद करने के लिए अवश्य निकालें। उन्होंने कहा कि यह संसार हमारा स्थायी ठिकाना नहीं है। हम सबने इस दुनिया को पक्का घर मान लिया है, लेकिन यह घर और यह दुनिया हमें एक दिन छोड़नी ही पड़ेगी |
संत बीरेंद्र सिंह जी ने समझाया कि हर परिवार और हर रिश्ता कर्मों के हिसाब से बनता है। जो लोग हमारे जीवन में हैं, वे हमारे कर्मों के लेखे-जोखे के अनुसार हैं। इन कर्मों का हिसाब पूरा करना तो जरूरी है, परंतु ध्यान हमेशा सतगुरु की ओर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा काम वही है जो आत्मा को ऊपर उठाए, जो हमें मालिक के करीब ले जाए। बाकी सब तो एक दिन यहीं रह जाना है।
