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टिटहरी ने दिए अंडे, मानसून में बरसात का संकेत, प्राणी शास्त्र के प्रोफेसर ने किया ये दावा, होगी भारी बरसात

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The lapwing lays eggs, signaling monsoon rains. A zoology professor claims heavy rains will occur


मानसून की कुछ ही दिनों में बरसात शुरू हो जाएगी। मानसून को लेकर अभी से मौसम वैज्ञानिक अपने माध्यम से बरसात को लेकर पूर्वानुमान जारी कर रहे हैं। प्राणी शास्त्र विभाग के प्रोफेसर ने एक पक्षी के अंडों को देखकर अपना अनुमान बताया है। आपको बता दें कि परंपरागत रूप से टिटहरी के द्वारा दिए जाने वाले अंडों की संख्या से भी किसान इसका सटीक अनुमान लगा लेते हैं।
बता दें कि मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्राणी शास्त्र के प्रो. ने इस संबंध में दो शोध पत्र भी प्रस्तुत किए हैं। बैतूल के जयवंती हाक्सर शासकीय कालेज की छत पर टिटहरी ने 4 अंडे दिए हैं। जब इन प्रोफेसर ने अंडे देखे तो उनके द्वारा इस बार अच्छी बरसात होने का दावा किया जा रहा

आपको बता दें कि इसी वर्ष प्रोफेसर डा. सुखदेव डोंगरे ने टिटहरी के 4 अंडों का अवलोकन किया। उन्होंने महाविद्यालय भवन की छत पर टिटहरी अंडों के पास दिखी, टिटहरी ने चार अंडे भूरे रंग के काले धब्बे वाले दिए हैं।


प्राणी विभाग के प्रोफेसर के अनुसार नर-मादा पक्षी लगातार अंडों को सेने का कार्य कर रहे हैं। डा. डोंगरे का शोध अध्ययन बताता है कि  टिटहरी (सेंड पाइपर) ने 4 अंडे वाणिज्य भवन की छत पर दिए हैं । आरएमनाईक, पी.वी. जार्ज, बी धुर्वे (1961) मुंबई, मुनकर तेज (1985) पूना, एस श्रीधर करबंकी (1991) केसी टसंग व वांग लुअन केंग (2007) के मुताबिक जिस वर्ष टिटहरी 4 अंडे देती है उस साल अच्छी बरसात होती है।


उनके अनुसार टिटहरी पक्षी अक्सर जोड़े में मानसून के पहले दिखाई देते हैं। इनका प्रजनन का समय मार्च से अगस्त तक होता है। ये पक्षी एक स्थान से दूसरे स्थान,  राज्यों तथा दूसरे देशों में माइग्रेशन एवं प्रजनन करते हैं।


बता दें कि यह पक्षी 35 से.मी. लम्बे होते हैं इनके पंख एवं चोंच हल्के भूरे रंग की होती है, लेकिन सिर छाती और गर्दन का अग्रभाग काला होता है, बगल में सफेद रंग होता है, लाल आंख होती है। पैर लम्बे और पीले रंग के होते हैं, जिसके कारण तेज दौड़ते हैं।

बता दें कि यह टिटहरी पक्षी भारत के साथ साथ टर्की, इराक, अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, बर्मा, श्रीलंका में पाए जाते हैं। पक्षी नर व मादा समान होते हैं, लेकिन नर के पंख माता की तुलना में 5 प्रतिशत लम्बे हाते हैं, पानी के नजदीक सूखी जगह पर निवास करते हैं। इनकी उड़ान धीमी होती है, लेकिन चाल बहुत तेज होती है।


बता दें कि मौसम वैज्ञानिक टिटहरी के चार अंडे देने पर अच्छी बरसात होने की बात से सहमत नहीं हैं, परंतु राजस्थान, बुंदेलखण्ड के किसान इस धारणा को मान्यता प्रदान करते हैं। प्राणिशास्त्र के वैज्ञानिक, प्रोफेसर एवं शोधकर्ता टिटहरी के 4 अंडे देने पर यह मानते हैं कि बरसात बहुत अच्छी होगी। इनका यह भी मानना है कि मौसम के परिवर्तन का असर पक्षियों के शरीर पर पड़ता है। उसी आधार पर पक्षी माइग्रेश एवं प्रजनन करते हैं और अंडे देते हैं।


बता दें कि पक्षियों के व्यवहार में बदलाव मौसम परिवर्तन के कारण आता है। इस आधार पर कह सकते हैं टिटहरी ने अप्रैल 2024 मे 4 अंडे उनके स्थान छत पर ऊंची जगह पर दिए हैं इसलिए 2024 में अच्छी बरसात होने की पूरी उम्मीद एवं संभावना है।


सटीक साबित हुए हैं 2 शोधपत्र
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोधकर्ता डा. सुखदेव डोंगरे ने इससे पहले 2 शोधपत्र 2012 एवं 2022 में टिटहरी के अंडों पर प्रस्तुत किए थे। इसमें 2012 में 61.25 बरसात हुई थी एवं 2022 में  63.50 इंच बरसात दर्ज की गई थी। टिटहरी को मानसून का पूर्वाभाष होता है।