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गांव की पैक्स को नजरअंदाज कर चहेती निजी सोसाइटियों को बांटे जा रहे खाद के हजारों गट्टे: लखविंदर सिंह औलख

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Thousands of fertilizer bags being distributed to favored private societies while village PACS are ignored: Lakhwinder Singh Aulakh

mahendra india news, new delhi
 भारतीय किसान एकता बीकेई के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को समय पर खाद (डीएपी व यूरिया) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वितरण का 60 प्रतिशत कोटा कोआॅपरेटिव सेक्टर और 40 प्रतिशत कोटा प्राइवेट सेक्टर को निर्धारित किया गया था। इस व्यवस्था का मुख्य ध्येय यह था कि गांवों के अंतिम छोर पर बैठे किसान को पैक्स और उनके बिक्री केंद्रों के जरिए आसानी से खाद मिल सके। सिरसा जिले का उदाहरण देते हुए किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि जिले में 38 पैक्स और उनके अधीन 201 बिक्री केंद्र संचालित हैं, जो पूरे जिले के गांवों को कवर करते हैं। इसके बावजूद गांवों की पैक्स तक खाद का न्यायोचित और बराबर वितरण नहीं हो पा रहा है।

लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि जब इस गंभीर समस्या को लेकर वे हैफेड के डीएम राजेश हुडा से मिले, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पैक्स वाले खाद की डिमांड ही नहीं भेजते, जो पैक्स डिमांड भेजती है, उसे खाद दे दी जाती है। इसके पश्चात जब वे कोआॅपरेटिव बैंक के जीएम ऋषि पाल से मिले, तो उन्होंने भी इस विषय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालना यह साफ दशार्ता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही के कारण आम किसान परेशान हो रहा है।
खाद की बंदरबांट और रसूखदारों का कब्जा:
औलख ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा एफपीओ, प्राइवेट मल्टीपरपज कोआॅपरेटिव सोसाइटी और अन्य नई सोसाइटियां बनवाई गई हैं। इन सोसाइटियों के संचालन में कई पुराने खाद कारोबारी, बड़े पूंजीपति और प्रशासनिक व राजनीतिक रसूख वाले लोग शामिल हो चुके हैं। हैफेड, इफको और कृभको द्वारा आने वाले हर रैक में से पैक्स और किसानों के बिक्री केंद्रों को उचित आवंटन देने के बजाय, इन नई बनी प्राइवेट कोआॅपरेटिव सोसाइटियों को हजारों की संख्या में कट्टे सीधे सप्लाई किए जा रहे हैं। सिरसा ही नहीं, पड़ोसी जिले फतेहाबाद में भी खाद की इसी तरह खुलेआम बंदरबांट जारी है।

 

सरकार और कृषि महानिदेशक को भेजी शिकायत:
औलख ने बताया कि इस पूरे प्रकरण और खाद वितरण खेल की विस्तृत जानकारी एक शिकायत पत्र के माध्यम से हरियाणा सरकार तथा कृषि महानिदेशक को भेज दी गई है। शिकायत में उन विशिष्ट लोगों व सोसाइटियों के नाम भी उजागर किए गए हैं, जिन्हें हर रैक में से नियम दरकिनार कर हजारों खाद के कट्टे दिए जा रहे हैं।

 

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संघर्ष की दी चेतावनी:
लखविंदर सिंह औलख ने स्पष्ट किया कि अब गेंद कृषि विभाग और राज्य सरकार के पाले में है। यदि विभाग इस पूरे खेल पर तुरंत अंकुश नहीं लगाता और गांवों की पैक्स समितियों के माध्यम से किसानों को खाद का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित नहीं करता, तो किसानों के हितों की रक्षा के लिए जल्द ही संघर्ष का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।